राजस्थान: एमबीएस अस्पताल में कमीशन की लड़ाई से खुला घोटाले का तिलिस्म

एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने 27 अप्रैल 2017 को फुटकर आइटम सप्लाई के लिए आरसी (रेट कॉन्ट्रेक्ट) की थी.

राजस्थान: एमबीएस अस्पताल में कमीशन की लड़ाई से खुला घोटाले का तिलिस्म
लोकल टेंडर में अधिक दर पर लिक्विड शॉप की आरसी तक कर दी गई.

कोटा/मुकेश सोनी: एमबीएस अस्पताल के एक बाबू ने अपने शातिर दिमाग से घोटाले का एक ऐसा तिलिस्म खड़ा कर दिया. जिसने लोकल परचेज में घोटाले के कई रिकॉर्ड तोड़ डाले. इस बाबू ने अपने शातिर दिमाग से बड़ी चतुराई से फुटकर आइटम की आरसी (रेट कॉन्ट्रेक्ट) में ड्रग-मेडिसिन के दो आइटम भी शामिल करवा दिए है. वहीं लोकल टेंडर में अधिक दर पर लिक्विड शॉप की आरसी तक कर डाली. इस बीच कमीशन को लेकर बाबू व अकाउंटेंट में झगड़ा हो गया. बात सड़क तक पहुंच गई तो कमीशन के तिलिस्म का खुलासा हुआ. 

एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने 27 अप्रैल 2017 को फुटकर आइटम सप्लाई के लिए आरसी (रेट कॉन्ट्रेक्ट) की थी. मेसर्स प्रियांशु एंटरप्राइजेज को दो साल के लिए की गई थी. इस बाबू ने शातिर तरीके से गली निकालकर स्पॉरीसाईडल सोल्यूशन (डिसइंफेक्टेन्ट) व स्टूमेंट क्लीनर को भी फुटकर आइटम में शामिल करवा दिया. जबकि ये दोनों आइटम ड्रग-मेडिसिन की श्रेणी आते है. कमीशनखोरी का खेल देखिए अस्पताल ने फुटकर आइटम की आरसी पर करीब 13 लाख रुपये का स्पॉरीसाईडल सोल्यूशन भी खरीद लिया. जबकि फुटकर आइटम की आरसी पर बल्क में (लाखो का) माल नहीं खरीदा जा सकता.

उसी तरह अस्पताल में लोकल टेंडर के तहत जनरल आइटम की सप्लाई के लिए साल 2017 में ऑनलाइन निविदा जारी की. जिसमे लिक्विड शॉप विद डिस्पेंसर (डिटोल/लाइफबॉय) प्रति 200 एमएल की दर 135 रुपये अनुमोदित की. जबकि बाजार में इस लिक्विड शॉप का खुदरा मूल्य  85 से 100 रुपए है. अस्पताल प्रशासन ने आरसी के मुताबिक सप्लायर फर्म को जनवरी में वर्क ऑर्डर जारी किए और फर्म ने माल भी सप्लाई कर दिया. बिल में 159 रुपये लगा कर पेश कर दिया. अस्पताल प्रशासन ने जनवरी माह में सेंट्रल लेब (माइक्रोबायलॉजी) व ब्लड बैंक के लिए सप्लायर फर्म को ऑर्डर जारी किए थे.

कमीशन के खेल ने खोली पोल
सूत्रों की मानें तो लिक्विड शॉप सप्लाई का बिल जब अकाउंटेंट के पास पहुंचा तो उसने कमीशन की डिमांड की. बाबू व अकाउंटेंट में कमीशन की लड़ाई सड़क तक पहुंच गई. इस बीच सप्लायर का लाखों का भुगतान रोक दिया गया. मामला अधीक्षक तक पहुंचा. इधर सप्लायर फर्म ने 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुए लिखित में अस्पताल अधीक्षक को शिकायत कर दी और दोषियों के खिलाफ जांच की मांग की. सप्लायर फर्म ने शिकायत की कॉपी मुख्यमंन्त्री, चिकित्सा मंत्री से लेकर एसीबी कोटा को भी भेजी है. ये तो मात्र बानगी है इस बाबू ने कमीशन के खेल में चक्रव्यूह रच रखा है. अधिकारी भी आंखे मूंद कर फाइलों पर साइन कर देते है. इसकी चर्चा अब तो एमबीएस के गलियारों में भी सुनने को मिल रही है. अब ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि आखिर किसकी शह पर अस्पताल में ये कमीशन का खेल पनप रहा है.