डूंगरपुर में खुली स्कूल प्रशासन की पोल, पोषाहार के नाम पर बच्चों को दिया जा रहा...

दलित बस्ती के दोनों स्कूलों में संचालित पोषाहार और दूध पिलाने की योजना में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई है.

डूंगरपुर में खुली स्कूल प्रशासन की पोल, पोषाहार के नाम पर बच्चों को दिया जा रहा...
पोषाहार प्रभारी की मनमर्जी से बच्चों को पोषाहार खिला रहे हैें.

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में बच्चो के लिए पोषाहार व दूध योजना चलाई जा रही है. लेकिन स्कूल प्रबंधन की गड़बड़ियों के चलते इन योजनाओं का लाभ बच्चो को नहीं मिल पा रहा है. मामला शहर की दलित बस्ती में स्थित राजकीय बापा उच्च प्राथमिक स्कूल व विवेकानंद कॉलोनी की सरकारी स्कूल का है. 

वहीं, दलित बस्ती के दोनों स्कूलों में संचालित पोषाहार और दूध पिलाने की योजना में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई है. दलितों की बस्ती में संचालित राजकीय बापा उच्च प्राथमिक स्कूल में पोषाहार प्रभारी की मनमर्जी से मापदण्डों के कम बच्चों को पोषाहार खिलाया और दूध दिया जा रहा है, जिसकी पुष्टि स्कूल के संबंधित रिकॉर्ड संधारण से साफ तौर की जा सकती है, पोषाहार पक जाने के बाद भी रिकॉर्ड संधारित नहीं था. दूध की पुरानी एंट्री में तारीख तक दर्ज नहीं किया जाना सवाल खड़े कर रहा है. 

साथ ही, स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा भी कम थी. स्कूल में 30 बच्चे मौजूद थे लेकिन पानी जैसी सब्जी खिलाई गयी और ऐसा ही दूध पिलाया गया. वहीं, ढाई किलो गेहूं के आटे की रोटी बनवाये जाने की जानकारी तो दी गयी लेकिन कुक ने साफ कह दिया कि इतने आटे से तो 20 से ज्यादा बच्चों को नहीं खिलाया जा सकता. जबकि, मौके पर दूध की आधा लीटर की आज की तीन पॉलीथिन पाई गई जिसमें से एक भी उपयोग नहीं हुआ था. जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक लीटर दूध को 30 बच्चों में किस हद तक पानी मिलाकर परोसा गया होगा. इधर, मामला सामने आने के बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक श्रीमाली ने माना कि पोषाहार और दूध योजना के रिकॉर्ड और वितरण में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब प्रभारी को बदल दिया जायेगा. 

इसी तरह शहर के ही महारावल स्कूल की विवेकानंद कॉलोनी में संचालित ब्रांच में भी हालात इसी तरह के है. जहां बच्चों के लिए बनाई गई दाल में पानी ही दिखाई दिया और स्कूल की शिक्षिका गायत्री का कहना था कि आधा किलोग्राम दाल उपयोग में ली गयी थी. लेकिन कुकर में दाल का एक दाना नहीं था. स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार सोमवार को अर्द्ध वार्षिक परीक्षा नहीं देने वाले 35 बच्चों को दूध पिलाया गया. जबकि, मंगलवार को मौके पर केवल 5 बच्चे ही थे जो स्कूल समय के बाद रिकॉर्ड में बच्चों की संख्या बढ़ा कर दर्ज करने की और इशारा करता है. 

यह तमाम हालात तो जिला मुख्यालय पर स्थित सरकारी स्कूल के हैं जहां, शिक्षा विभाग और प्रशासन के सभी बड़े अधिकारी मौजूद रहते है. ऐसे में ग्रामीणों हल्के की दुर्दशा का अंदाजा लगाया जा सकता है. खैर अब देखना होगा की स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही इन योजनाओं के क्रियान्वयन में पलीता लगाने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है.