Rajasthan में 'संकट मोचक' साबित हुई SDRF, 5 सालों में बचाईं 7 हजार 383 जानें

प्रदेश की कई बड़ी आपदाओं में एसडीआरएफ के जवानों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया और कई लोगों की जान बचाई. पिछले 5 सालों में एसडीआरएफ की तरफ से किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue operation) हर साल दोगुने होते चले गए.

Rajasthan में 'संकट मोचक' साबित हुई SDRF, 5 सालों में बचाईं 7 हजार 383 जानें
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur: प्रदेश में 2013 में आपदा प्रबंधन बटालियन एसडीआरफ (State Disaster Response Force) के गठन करके नयी भर्तियां की गयी. 7 साल पहले बनी ये बटालियन अब परिपक्व होने लगी है. 

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प्रदेश की कई बड़ी आपदाओं में एसडीआरएफ के जवानों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया और कई लोगों की जान बचाई. पिछले 5 सालों में एसडीआरएफ की तरफ से किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue operation) हर साल दोगुने होते चले गए.

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प्राकृतिक आपदा (Natural disaster) के दौरान हालातों पर नियंत्रण के एसडीआरएफ यानी स्टेट डिजास्टर रिलीफ मैनेंजमेंट बटालियन का गठन का गठन हुआ थ. उसका काम अब गति पकड़ने लगा है. वित्त विभाग की मदद से बटालियन को बजट और अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाये गए हैं, जिससे एनडीआरएफ की तर्ज पर जवानों के कौशल को निखारा गया. 

हर आपदा से निपटने के लिए तैयार रहता है एसडीआरएफ
दरअसल, साल 2012-13 के बजट में बटालियन के गठन की घोषणा की गई थी, जिसमें करीब 800 अधिकारी, जवानों की भर्ती के साथ 2013 में एसडीआरएफ का गठन हुआ. साल 2016 से इसने अपने पूर्ण कौशल के साथ काम करना शुरु किया. एसडीआरएफ के गठन के बाद पिछले 5 सालों में किसी भी तरह की आपदा होने पर प्रदेश के किसी भी हिस्से में तत्काल सहायता मिलने लगी है. इसके लिए एसडीआरएफ के जवानों को एनडीआरएफ के प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलवाया गया है. पानी से आने वाली आपदा हो या फिर जमीन में आने वाले भूकंप से होने वाली आपदा, ये जवान सभी से निपटने के लिए हरदम तैयार है. बहुमंजिला इमारतों के गिर जाने की स्थिति में भी ये जवान कुशलता से मौके पर काम कर सकते है, और घायलों को तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाने में प्रशिक्षित है. राजस्थान देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां पर एनडीआरएफ की ओर से चार स्थानों पर प्रशिक्षण दिया गया.

कैसे काम करती है SDRF
प्रदेश में एसडीआरएफ के गठन से पहले जब भी बाढ़ के हालात बने तो एनडीआरएफ की टीम को सहायता के लिए बुलाया गया था. एनडीआरएफ की टीम को कई बार आने में देरी भी हुई, जिससे स्थितियां और भी गंभीर हो गईं लेकिन अब प्रदेश में जब भी ऐसी स्थिति बनती भी है, तो हमारे खुद के जवान हरदम तैयार रहते हैं. इससे आपदा में फंसे लोगों के तत्काल सहायता मिल जाती है. 

एसडीआरएफ के एडीजी सुष्मित बिश्वास (Sushmit Biswas) का कहना है कि प्रदेश के बाहर भी जरुरत पड़ने पर हमारे जवानों को सहायता के लिए भेजा जाता है. जवानों को कोलोप्स स्ट्रक्चर सर्च, रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल फस्ट रेस्पोन्डर और रोप रेस्क्यू ऑपरेशन पुरा करने के लिए कुशलता से ट्रेनिंग दी गई है. साथ ही आधुनिक यंत्र, एयर वेट लिफ्टिंग बैग, विक्टिम लोकेटिगं कैमरा, भूकम्प के दौरान गिरे पेड़ो को काटने के यन्त्र भी मुहैया कराए गए हैं, जिससे आपदा से तुरंत निपटने हुए घायलों को सहायता दी जा सके.

पिछले 5 सालों निभाई अहम भूमिका
प्रदेश में पिछले 5 सालों में एसडीआरएफ की ओर से 866 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए है. जिनके जरिये 7 हजार 383 लोगों की जान बचायी गई है. वहीं 465 शवों को रेस्क्यू कर निकाला गया. फिलहाल राज्य सरकार और एसडीआरएफ के अधिकारी टीम के जवानों को ओर भी कुशल बनाने की कोशिश में लगे हैं. उम्मीद है हर आपदा की स्थिति में एसडीआरएफ के जवान इसी तरह प्रदेशवासियों की रक्षा करते रहेंगे.

Copy- Ramashankar