राजस्थान में 'बजट' में अटकी लापता बच्चों की तलाश, 4 साल में 1511 हुए गुमशुदा

गुमशुदा बच्चों की वापसी का परिजनों की आंखें इंतजार करती रहती हैं. पुलिस की ओर से बच्चों के गुमशुदा होने के बाद उनकी तलाश के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. 

राजस्थान में 'बजट' में अटकी लापता बच्चों की तलाश, 4 साल में 1511 हुए गुमशुदा
प्रतीकात्मक तस्वीर.

विष्णु शर्मा, जयपुर: राजस्थान में घरों से लापता बच्चों की पुलिस तलाश 'बजट' में अटक गई है. इधर चार साल से 1511 गुमशुदा बच्चों का उनके परिजनों को इंतजार है. 

दरअसल, विधानसभा ने गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए इश्तेहार छपवाने के  निर्देश दिए हैं, लेकिन पुलिस मुख्यालय को इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये चाहिए. बजट स्वीकृति के लिए फाइल गृह विभाग में अटकी हुई है. 
राजस्थान में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे लापता हो रहे हैं. गुमशुदा बच्चों की वापसी का परिजनों की आंखें इंतजार करती रहती हैं. पुलिस की ओर से बच्चों के गुमशुदा होने के बाद उनकी तलाश के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं.

ऐसे में पिछले दिनों विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने लापता बच्चों की खोज के लिए राजस्थान पुलिस को निर्देश दिए. समिति ने बच्चों की तलाश के लिए सोशल मीडिया व अन्य दूसरे मीडिया का सहारा लेने का सुझाव दिया. समिति के इस सुझाव में बच्चों की तलाश बजट में आकर रुक गई. 

- प्राक्कलन समिति ने सुझाव दिया कि गुमशुदा बच्चों का फोटो विवरण सहित मीडिया में दिया जाए.
- इससे कोई भी व्यक्ति अपने आसपास गुमशुदा बच्चों को देखकर इसकी सूचना पुलिस को दे सकेगा.
- विधानसभा के उपसचिव ने 19 मई 2020 को इसके लिए डीजीपी को पत्र लिखा.
- 25 सितम्बर को एडीजी एएचटी ने पत्र लिखकर इश्तेहार पर खर्च का प्रस्ताव दिया.
- 18 नवम्बर को एसपी क्राइम विकास कुमार ने पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी.
- इसके बाद एडीजी पुलिस आयोजना, वित्तीय सलाहकार ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर इश्तेहार प्रकाशन के लिए बजट मांगा.

- इश्तेहार प्रकाशन पर एक करोड़ 44 लाख 20 हजार का संभावित खर्च बताया जा रहा है
- बजट मंजूरी का मामला फिलहाल गृह विभाग में अटका हुआ है. 
- वर्ष 2017 से जून 2020 तक 10 हजार 665 बच्चे लापता हुए. इनमें से 9 हजार 154 बच्चे वापस मिल गए.
- इनमें 1511 बच्चों के मां-बाप की आंखें उनकी घर वापस का इंतजार करते करते पथरा गई हैं.
-  वर्ष 2017 में 2435 बच्चे गुमशुदा हुए, उनमें से 2323 वापस मिले, शेष 112 का सुराग नहीं लगा.
- वर्ष 2018 में 2778 बच्चे लापता हुए, जिनमें 2583 घर लौट आए, जबकि 195 बच्चों का इंतजार है.
- वर्ष 2019 में 4018 बच्चे गुम हुए, जिनमें 3524 आए गए, लेकिन 494 बच्चों का अभी तक पता नहीं चला.
- इसी तरह जनवरी से जून 2020 तक 1434 बच्चे लापता हो चुके हैं, इनमें 724 मिल चुके हैं, लेकिन 710 लापता चल रहे हैं.