Beawar: एक माह के भीतर मृत मिली दूसरी मादा पैंथर, जांच में जुटा विभाग

थम दृष्टया मादा पैंथर की मौत शिकार के दौरान खदान में गिरकर डूबने से ही मानी जा रही है. 

Beawar: एक माह के भीतर मृत मिली दूसरी मादा पैंथर, जांच में जुटा विभाग
प्रतीकात्मक तस्वीर.

दिलीप चौहान, ब्यावर: जवाजा क्षेत्र की सुरड़िया ग्राम पंचायत के मजरा रेवलिया के जंगल में स्थित एक खदान में भरे पानी में सोमवार को मादा पैंथर मृत मिली थी. मंगलवार को मादा पैंथर के शव का देलवाडा रोड स्थित नर्सरी में पोस्टमार्टम किया गया. 

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मंगलवार को वन विभाग के निर्देश पर गठित तीन सदस्यी चिकित्सकों की मेडिकल बोर्ड की टीम ने मृत मादा का पोस्टमार्टम किया. इस दौरान डॉ. जावेद हुसैन, डॉ. साबिरसिंह तथा डॉ. विश्वास कुमार ने विसरा लेकर जांच के लिए अजमेर स्थित प्रयोगशाला भिजवाया. प्रयोगशाला से पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पैंथर की मौत के कारणों का खुलाशा हो पाएगा. हालांकि प्रथम दृष्टया मादा पैंथर की मौत शिकार के दौरान खदान में गिरकर डूबने से ही मानी जा रही है. 

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पोस्टमार्टम के बाद पैंथर के शव का अंतिम संस्कार हुआ
मेडिकल बोर्ड टीम के सदस्यों ने मृत मादा पैथर की उम्र डेढ़ वर्ष से ऊपर बताई है. उधर मादा पैथर की मौत की जानकारी के बाद मंगलवार सुबह सहायक वन अधिकारी अजमेर नरेन्द्रसिंह शेखावत भी ब्यावर पहुंचे. शेखावत की मौजूदगी में गिरदावर पांचूसिंह, रैंजर भैरूसिंह भाटी, वनपाल राकेश मालाकार, भगवानसिंह, मुकेश कुमार मीणा आदि की उपस्थिति में हुए पोस्टमार्टम के बाद पैंथर के शव का अंतिम संस्कार किया गया. 

मालूम हो कि रेंजर भैरूसिंह भाटी को सोमवार सुबह ग्रामीणों से सूचना मिली थी कि रेवलिया के समीप स्थित एक खान में भरे पानी में पैंथर डूबा हुआ है. सूचना के बाद वे मय टीम के मौके पर पहुंचे हैं. खदान करीब 80 फीट गहरी होने के कारण पैंथर के शव को निकालने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. करीब दो ढाई घंटे की मशक्कत के बाद कही जाकर पैंथर के शव को बाहर निकाला जा सका. शव के सड़ने एवं गंध आने के कारण शव के पास जाना भी मुश्किल हो रहा था. 

ज्ञात रहे कि सुरडिय़ा क्षेत्र में पैंथर की चहल कदमी सामान्य बात है. पिछले एक सप्ताह पूर्व भी यहां दो शावकों के साथ मादा पैंथर चहल-कदमी करती नजर आई थी. गंभीर बात यह भी है कि एक माह में यह दूसरी घटना है. इससे पहले भी सरवीना के समीप जैतगढ़ बामनिया के जंगल में खदान के पास ही एक साल का शावक मरा पड़ा मिला था. मगरा क्षेत्र में पैंथर की संख्खया काफी है, जो खुले आम विचरण करते देखे जा सकते हैं. यहीं नहीं, पैंथर आबादी इलाकों में आकर जान माल को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.