सरकारी अस्पतालों में गर्मी से तड़पे मरीज, बोले- कोरोना से नहीं, इससे जरूर मर जाएंगे

अस्पताल प्रशासन ने यहां आने वाले मरीजों के लिए छांव की व्यवस्था नहीं कर रखी है. 

सरकारी अस्पतालों में गर्मी से तड़पे मरीज, बोले- कोरोना से नहीं, इससे जरूर मर जाएंगे
अस्पताल प्रशासन ने यहां आने वाले मरीजों के लिए छांव की व्यवस्था नहीं कर रखी है.

मुकेश सोनी, कोटा: देश भर में धीरे-धीरे कोरोना का ख़ौफ़ बढ़ता जा रहा है. लोग कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ कई तरह के जतन भी कर रहे हैं. अब कोरोना के कहर के बीच प्रचंड गर्मी भी लोगों को परेशान कर रही है. 

ये दो तस्वीरें हैं, जिनसे आप अंदाजा लगा सकते हैं गर्मी के सितम की. पहली तस्वीर सम्भाग के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल जेके लोन की, जहां भीषण गर्मी के बाद भी पीआईसीयू (बच्चों का वार्ड) में एसी, कूलिंग नहीं दे रहे. इस कारण बंद पड़े हैं. भीषण गर्मी में वार्ड में भर्ती बच्चे पंखे की आग उगलती हवा को सहन कर रहे हैं. दूसरी तस्वीर कोटा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस की है, जहां करीब 42 डिग्री के तापमान में लोग दवा के लिए लाइन में खड़े हैं. 

मन में कोरोना का ख़ौफ़ ऊपर से गर्मी का टॉर्चर, लोगो के मुंह से बस एक ही बात निकल रही है. उफ, कोरोना ही नहीं, ये गर्मी भी मार डालेगी.

हाल-ए-जेके लोन
आग उगलती गर्मी में मातृ एवं शिशु अस्पताल जेके लोन में पीआईसीयू (बच्चों का वार्ड) में भर्ती बच्चे पिछले एक माह से पंखों की गर्म हवा खाने को मजबूर हैं. जिम्मेदार अधिकारी एसी की हवा में बैठक कर भी बच्चों की पीड़ा को नहीं समझ रहे हैं. पीआईसीयू में न्यूमोनिया, दिमागी बुखार, मलेरिया सहित अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित 1 माह के बच्चों से लेकर 18 साल के किशोरों को भर्ती किया जाता है. यहां 12 बेड और 6 एसी हैं. फिलहाल पीआईसीयू में 6 बच्चे भर्ती है. जानकार चिकित्सकों के मुताबिक, बेहतर इलाज के लिए पीआईसीयू का तापमान 28 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए पर जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही के कारण बच्चे गर्मी में रहने को मजबूर हो रहे हैं. 

हाल-ए-एमबीएस हॉस्पिटल
एमबीएस की ओपोडी में आने वाले मरीजों के अस्पताल के बाहर 8 डीडीसी काउंटर लगे हैं, जिनमें से 7 काउंटर सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक खुलते हैं जबकि 1 काउंटर दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है. सुबह के समय खुलने वाले 7 काउंटर में से 3 काउंटर सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को महिलाओं के लिए आरक्षित रहते हैं. सीनियर सिटीजन के लिए 1 काउंटर आरक्षित है. पिछले कुछ महीनों से मेडिकल कॉलेज कोटा से संबद्ध नए अस्पताल और सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है. ऐसे में कुछ एक को छोड़कर सभी विभागों को एमबीएस अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. सभी मरीज एमबीएस अस्पताल में इलाज के लिए पहुच रहे हैं. एमबीएस की ओपीडी में इजाफा हुआ है. ऐसे में दवा काउंटरों (डीडीसी) पर भी लोड बढ़ा है. इन दिनों दवा काउंटर के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही है. 

अस्पताल प्रशासन ने यहां आने वाले मरीजों के लिए छांव की व्यवस्था नहीं कर रखी है. भीड़ ज्यादा होने पर मरीजों को दवा के लिए कड़ी धूप में खड़ा रहने को मजबूर होना पड़ता है. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना नहीं हो पा रही है.

क्या है जेके लोन अस्पताल अधीक्षक का कहना
जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. एस सी दुलारा का कहना है कि पीआईसीयू में लगे एसी सरकारी सप्लाई (आरएमएससीएल) में आए थे. ये वारंटी पीरियड में हैं. ये कूलिंग नहीं दे रहे. संबंधित फर्म से सम्पर्क किया था लेकिन फर्म के इंजीनियर नहीं आए. इस कारण यह ठीक नहीं हुए. अब लोकल स्तर पर इन्हें ठीक करवाने की प्रक्रिया शुरू की है.