नागौर में दलितों के साथ हुई बर्बरता का शेरगढ़ में विरोध, भील समाज ने निकाली रैली

विरोध में भील समाज विकास समिति तहसील शेरगढ़ द्वारा जिले में रैली निकालकर उपखंड अधिकारी डॉ. मनोज खेमाधा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है.

नागौर में दलितों के साथ हुई बर्बरता का शेरगढ़ में विरोध, भील समाज ने निकाली रैली
इस घटना ने पूरे राजस्थान ही नहीं, पूरे देश और मानव समाज को शर्मसार और कलंकित किया है.

अरुण हर्ष, शेरगढ़: नागौर जिले में दलित युवकों पर असामाजिक तत्वों द्वारा बर्बरता पूर्वक यातनाएं दी गईं, जिसके विरोध में भील समाज विकास समिति तहसील शेरगढ़ द्वारा जिले में रैली निकालकर उपखंड अधिकारी डॉ. मनोज खेमाधा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है.

इसमें बताया कि नागौर जिले के पांचौड़ी थानांतर्गत करणु गांव में भील समाज के युवकों के साथ पशुता पूर्वक व्यवहार करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने एवं इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने की मांग की है. 

अध्यक्ष लालूराम भील सहित भील समाज के लोगों ने ज्ञापन में बताया कि राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद कमजोर तबकों में आशा जगी थी कि सामाजिक उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आएगी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया दलित, गरीब और पिछड़े तबके के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने वाले लोग सत्ता परिवर्तन की मानसिकता नहीं बदली. घटना का वीडियो देखने से ऐसा लगता है कि दलित, गरीबों और पिछड़ों के प्रति समाज में घटनाएं बढ़ रही हैं. जिस प्रकार से घटना को अंजाम दिया गया है, इससे साबित होता है कि बगैर किसी उच्च संरक्षण के इस प्रकार की वारदात करने की हिम्मत संभव नहीं है.

मानव समाज को शर्मसार और कलंकित किया 
राज्य के अधिकांश मामलों में पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत के चलते कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाती है, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है. नागौर जिले के पाचौड़ी थानांतर्गत करणु गांव में एक मोटर साइकिल एजेंसी में नायक जाति के दो युवकों विसाराम नायक पुत्र जगदीशराम और पन्नाराम नायक पुत्र कालूराम के साथ भीवसिंह, जस्सूसिंह, आईदानसिंह, सवाईसिंह, लिक्ष्मणसिंह, हनुमानसिंह और गणपत सोनी ने अमानवीय तरीके से मारपीट की तथा पीड़ित के गुप्तांगों में पेट्रोल डाल दिया. वारदात के बाद आरोपियों द्वारा बेखौफ होकर वीडियो को वायरल कर सनसनी और भय का माहौल बनाने का दुस्साहस भी किया है. इस घटना ने पूरे राजस्थान ही नहीं, पूरे देश और मानव समाज को शर्मसार और कलंकित किया है.

घटनाओं पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जाए
समाज के लोगों ने इस वारदात में शामिल लोगों को अविलंब गिरफ्तार करके जेल भिजवाने, पीड़ितों को उचित इलाज, पुलिस संरक्षण और मुआवजा दिलाने तथा पांचौड़ी थाने के पूरे स्टाफ को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए ताकि अपराधियों को प्राथमिक संरक्षण स्तर पर ही मिलता है, वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं. पीड़ितों के खिलाफ दर्ज मामले में एफआईआर लगाई जाए तथा राज्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जाए. यदि सरकार की मानसिकता नहीं बदली तो राज्य सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.