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सीकर: शहीदों का परिवार सरकारी सहायता के लिए खा रहा ठोकरें, प्रशासन बेखबर

12 जुन 1999 को जम्मु कश्मीर में कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते लेते वीर सैनिक दयाचंद जाखड़ शहीद हो गए थे. 

सीकर: शहीदों का परिवार सरकारी सहायता के लिए खा रहा ठोकरें, प्रशासन बेखबर
उस समय वीर शहीद दयाचंद जाखड़ का पुत्र अनुराग नाबालिग था.

लक्ष्मणगढ़: देश की सुरक्षा के लिए शेखावाटी क्षेत्र के वीर सपूत सैनिक दुश्मनों से लोहा लेते लेते भले ही शहीद हो गए हो लेकिन सरकार की लचर व्यवस्था के कारण शहीदों की विरांगनाएं आज भी सरकारी सहायता के नाम पर दर दर की ठोकरें खा रही है.

सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र के रहनावा गांव के पूर्व सैनिक रामनाथ सिंह जाखड़ के घर 1 जुलाई 1967 को वीर सपुत दयाचंद जाखड़ ने जन्म लिया. सैनिक परिवार में जन्म दयाचंद जाखड़ की भी बचपन से ही देश की सेवा करने की दिले तमन्ना थी. शिक्षादिक्षा के साथ ही दयाचंद जाखड़ 28 नम्बवर 1987 को सैना में लॉस नायक 4 जाट रेजीमेंट में नियुक्त हुए. 

12 जुन 1999 को जम्मु कश्मीर में कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते लेते वीर सैनिक दयाचंद जाखड़ शहीद हो गए. उस समय वीर शहीद दयाचंद जाखड़ का पुत्र अनुराग नाबालिग था. केन्द्र सरकार की ओर से वीर शहीदो के आश्रितों को सहायता दी गई थी. लेकिन कारगिल युद्ध में शहीद दयाचंद जाखड़ की विरांगना बिमला देवी को राजस्थान की तत्कालीन गहलोत सरकार द्वारा वीर शहीद दयाचंद जाखड़ के पुत्र अनुराग जाखड़ को बालिग होने पर सरकारी नौकरी देने का अश्वासन दिया गया था.

शहीद दयाचंद जाखड़ का पुत्र अनुराग जाखड़ की उस समय महज ढेड़ साल की आयु थी. आज अनुराग जाखड़ एमए व बीएड की शिक्षा प्राप्त कर चुका है. कारगिल युद्ध में शहीद दयाचंद जाखड़ की विरांगना विमला देवी को सरकारी सहायता दिलाने के प्रयास में शहीद दयाचंद जाखड़ का छोटा भाई प्रतापसिहं जाखड़ करीब तीन साल से चक्कर लगा रहे हैं. 

हालांकि शेखावाटी इलाके के दो कारगिल युद्ध शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई थी. लेकिन प्रतापसिंह जाखड़ सरकारी सिस्टम के आगे वह भी हार चुका हैं. आखिरकार कारगिल युद्ध में शहीद दयाचंद जाखड़ की वीरांगना विमला देवी ने पुत्र अनुराग को सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने धरना देने की चेतावनी दी है.