सीकर: जनाना अस्पताल में शुरू हुई प्रीमेच्योर बेबी के लिए कंगारू केयर व्यवस्था

ऐसा करने से नवजात और मां एक दूसरे से स्पर्श कर सकेंगे. इस विधि का मकसद शिशु को अपने शरीर की गर्मी देना है जो शिशु जन्म के समय ज्यादा कमजोर होते हैं.

सीकर: जनाना अस्पताल में शुरू हुई प्रीमेच्योर बेबी के लिए कंगारू केयर व्यवस्था
प्रतीकात्मक तस्वीर

सीकर: राजस्थान के सीकर के राजकीय जनाना हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से कंगारू केयर बेबी कॉर्नर तैयार किया गया है. कॉर्नर में दो स्पेशल चेयर लगाई गई हैं. कंगारू केयर एस ऐसी तकनीक है जो प्रीमेच्योर और कम वजन वाले नवजात शिशु के इलाज के लिए काम में ली जाती है. इस तकनीक में शिशु को मां, कंगारू की विधि में नवजात बच्चे को सीने से चिपका कर रखती है ताकि उसका तापमान मेंनटेन रह सके. 

कंगारू केयर बेबी कॉर्नर का शुभारंभ अस्पताल में हुआ है. कंगारू देखभाल करना ठीक वैसा ही है जैसे कंगारू अपने बच्चे को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखने के लिए उसे अपने पेट की थैली में रखता है. इसी विधि में मां शिशु को कंगारू की तरह अपने सीने से चिपका कर रख पाएगी और स्तनपान करा पाएगी.

ऐसा करने से नवजात और मां एक दूसरे से स्पर्श कर सकेंगे. इस विधि का मकसद शिशु को अपने शरीर की गर्मी देना है जो शिशु जन्म के समय ज्यादा कमजोर होते हैं, समय से पहले जन्म लेते हैं, उनके लिए यह विधि कारगर है. कंगारू देखभाल से गर्मी की कमी को पूरा किया जाता है. कंगारू देखभाल से शिशु को सही मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है और उसका विकास भी तेजी से होता है 

कंगारू विधी मां के अलावा उसकी दादी, मौसी, बुआ भी कर सकती हैं. इस विधि के शुरू हो जाने से बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी. जो नवजात शिशुओं के लिए वरदात साबित होगी.