सीकर: निकाय चुनाव 2019, राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों में दल बदलने की होड़

आगामी निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस के दिग्‍गज नेता दौलत कुमार ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है, तो वहीं भाजपा के दिग्‍गज नेता अशोक अग्रवाल अब कांग्रेस की शरण में चले गए हैं.

सीकर: निकाय चुनाव 2019, राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों में दल बदलने की होड़

सीकर: नीम का थाना में होने वाले निकाय चुनाव में इन दिनों दोनों ही पार्टियों के नेता और पदाधिकारी दल बदलने में लगे हुए हैं. इसरी कड़ी में कांग्रेस के दिग्‍गज नेता दौलत कुमार ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है, तो वहीं भाजपा के दिग्‍गज नेता अशोक अग्रवाल अब कांग्रेस की शरण में चले गए हैं. वहीं ऐसे दर्जनों नेता हैं जिन्होनें निकाय चुनाव के तहत दुसरी पार्टियों की सदस्यता ग्रहण कर ली हैं. वहीं फैसले को लेकर सभी नेता अलग अलग तर्क दे रहे हैं.

वार्ड में चल रही तोड़फोड़ की यह जंग बड़े नेताओं को भी रास आई. दल बदलने में बडे नेताओं की भी शह की बात सामने आ रही है. वहीं पूर्व और वर्तमान विधायक की देखरेख में यह सब काम हुआ है. भाजपा छोडने वालों को पूर्व मंत्री और खेतडी से कांग्रेस विधायक डॉ जितेन्‍द्र सिंह साथ ही नीम का थाना से कांग्रेस के विधायक सुरेश मोदी ने कांग्रेस की रीति नीतियों पर चलने का पाठ पढाया और उनका कांग्रेस से जुडने पर स्‍वागत किया. तो कांग्रेस के हाथ को छोड भाजपा का कमल खिलाने के लिए ज्‍वाइन करने वाले नेताओं को पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर ने आर्शीवाद दिया और स्‍वागत किया.

चुनाव में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए आतुर रहने वाले एक दूसरे पर आरोप प्रत्‍यारोप करने वाले बडे दिग्‍गज नेता भी एक मंच पर नजर आए. जहां विधानसभा चुनावों में 2008 में प्रेम सिंह बाजौर को पटखनी दे चुके कांग्रेस से पूर्व विधायक रहे रमेश खंडेलवाल विकास मंच के बैनर के साथ बाजौर के साथ आ गए हैं. उनकी अपनी मजबूरी है और मजबूरी यह कि 2018 में रमेश खंडेलवाल का टिकट काटकर कांग्रेस ने सुरेश मोदी को थमा दिया तभी से रमेश खंडेलवाल ने पार्टी के खिलाफ बागी तेवर अपनाया और विधानसभा चुनाव में तोल ठोक दी. रमेश खंडेलवाल विधानसभा चुनाव में बाजौर पर जमकर प्रहार करते थे और अब वे बाजौर के सुर में सुर मिला रहे हैं. खंडेलवाल ने नगर पालिका बोर्ड पर कब्‍जा जमाने के लिए भाजपा और बाजौर से हाथ मिला लिया और वे दोनों संयुक्‍त रूप से समझौते से चुनाव लड रहे है तो कांग्रेस अपने बूते पर मैदान में है.

ये चुनाव ही तो है जिसके चलते नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्‍यारोप करते देखे जा सकते हैं और ये भी चुनाव ही हैं कि एक दूसरे पर छींटाकशी करने वाले नेता इन्‍ही चुनावों में साथ भी हो जाते हैं और अपने लगाए आरोपों को भूल जाते हैं.