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Khatu Shyam Ji: खाटूश्यामजी को बर्बरीक के नाम से भी जाना जाता है. जो भीम पुत्र घटोत्कच और दैत्यराज मुरा की बेटी काम्कंठ्का से जन्मे थे. काम्कंठ्सका को भगवान श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि तेरी कोख से एक महावीर पुत्र जन्म लेगा जो अजेय होगा और सर्वशक्तिमान बनेगा.
द्रोपदी ने क्यों दिया श्राप ?
इधर महाभारत में घटोत्कच को द्रोपदी ने श्राप दिया था. कहा जाता है कि जब घटोत्कच पहली बार अपे पिता भीम के राज्य में आया तो अपनी मां हिडिम्बा की आज्ञा के अनुसार उसने द्रोपदी का सम्मान नहीं किया. जिससे द्रौपदी को अपमानित महसूस हुआ और उसने घटोत्कच को श्राप दिया कि तेरा जीवन बहुत छोटा होगा और तू बिना किसी लड़ाई के ही मारा जाएगा.
कर्ण ने किया अमोघास्त्र का प्रयोग
भीम पुत्र घटोत्कच को विशालकाल शरीर और बल के लिये जाना जाता था. युद्ध में शत्रु सेना पर भारी पड़ सकने वाले घटोत्कच पर कर्ण ने अपने अमोघास्त्र का प्रयोग किया था. इस अस्त्र का वार कभी खाली नहीं जाता था, लेकिन इसका प्रयोग सिर्फ एक ही बार किया जा सकता था. ऐसे में दुर्योधन के कहने पर कर्ण ने इसे घटोत्कच पर प्रयोग किया, वरना अकेगा घटोत्कच ही पूरी कौरव सेना को खत्म कर सकता था
खाटूश्यामजी के तीन बाणों की ताकत
बाद में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक जिन्हे खाटूश्यामजी के नाम से जाना जाता है हुए. जिन्हे अर्जुन और कर्ण से बड़ा धनुर्धर माना जाता है. बर्बरीक के पास तीन बाण थे जो पूरी पांडव और कौरवों की सेना को समाप्त कर सकते थे.
बने गए हारे का सहारा
ये बात श्रीकृष्ण जी को पता थी ऐसे में श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान मांगा. बर्बरीक ने दान में मांगा गया शीश भी दे दिया. जिस पर प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने वरदान दिया कि तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे और वर्तमान में खाटूश्याम ही कलयुग के हारे का सहारा बने हुए हैं.