9 बार फेल होने के बाद भी बदल ली अपनी किस्मत, पढ़ें अनिल अग्रवाल की सक्सेस स्टोरी

Rajasthan News: कबाड़ बेचने से शुरुआत कर बार-बार असफल हुए अनिल अग्रवाल ने हार नहीं मानी. संघर्षों, कर्ज और टूटने के दौर से गुजरकर स्टरलाइट और फिर वेदांता जैसी वैश्विक कंपनी खड़ी की. पटना का यह युवा आज अरबपति उद्योगपति और लाखों युवाओं की प्रेरणा है.

9 बार फेल होने के बाद भी बदल ली अपनी किस्मत, पढ़ें अनिल अग्रवाल की सक्सेस स्टोरी
Image Credit: anil aggarwal success story

Rajasthan Success Story: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की कहानी उस इंसान की यात्रा है, जिसने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की, बार–बार असफल हुआ, टूट भी गया, लेकिन हर बार खुद को खड़ा किया और अंत में एक ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसकी गूंज आज पूरी दुनिया सुनती है. यह कहानी सिर्फ एक उद्योगपति की नहीं, बल्कि उस हिम्मत की है जो संघर्षों के बीच भी हार मानना नहीं जानती.

अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में एक साधारण मारवाड़ी परिवार में हुआ. घर में सुख–सुविधाएं कम थीं, लेकिन माता–पिता ने मेहनत और ईमानदारी की सीख जरूर दी. उनके पिता की एक छोटी-सी एल्युमीनियम कंडक्टर की दुकान थी, जिसमें अनिल बचपन से ही हाथ बंटाते थे. लेकिन 19 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि उन्हें अपना रास्ता खुद बनाना है, और इसी फैसले के साथ वह मुंबई आ गए. यहां शुरुआत आसान नहीं थी. रहने के लिए छोटा कमरा, जेब में सीमित पैसे और भविष्य को लेकर अनिश्चितताएं—सब कुछ उनके सामने था.

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मुंबई आने के बाद उन्होंने कबाड़ का कारोबार शुरू किया. स्क्रैप मेटल खरीदना–बेचना ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया था. इसी काम से उन्होंने बिजनेस की बारीकियां समझीं. 1976 में एक बड़ा जोखिम उठाते हुए उन्होंने एक संघर्षरत कंपनी शमशेर स्टर्लिंग केबल को खरीद लिया. पैसा कम था, हालात कठिन थे, और कई लोगों ने कहा कि यह कदम गलत है. लेकिन अनिल पीछे हटने वाले नहीं थे. उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी.

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इस कंपनी के बाद भी सफलता ने तुरंत दरवाजा नहीं खुला. उन्होंने लगातार 9 बिजनेस शुरू किए, लेकिन सब बुरी तरह असफल रहे. हालात इतने खराब हो गए कि वह जिंदगी के सबसे कमजोर दौर में पहुंच गए. डिप्रेशन, तनाव और आर्थिक तंगी. उन्होंने खुद कहा है कि उन दिनों वह ‘शोले’ फिल्म का टिकट भी नहीं खरीद सकते थे. पर यही दौर उनके सबसे बड़े सबक लेकर आया.

1980 के दशक में किस्मत ने दरवाजा तब खटखटाया जब सरकार ने टेलीफोन केबल बनाने में प्राइवेट कंपनियों को मौका दिया. अनिल ने इसे जीवन का सबसे बड़ा अवसर मानकर थाम लिया और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज़ की स्थापना की. यही कंपनी आगे चलकर भारत की पहली प्राइवेट कॉपर रिफाइनिंग कंपनी बनी.

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. धीरे–धीरे उन्होंने खनन, धातु, तेल और गैस के क्षेत्र में अपने बिजनेस का विस्तार किया. उनकी मेहनत और दूरदर्शिता ने वेदांता रिसोर्सेज को एक वैश्विक कंपनी बना दिया, जो आज कई देशों में प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में काम कर रही है.

कबाड़ से शुरुआत करने वाला यह युवा आज एक अरबपति उद्योगपति है, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि वे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. अनिल अग्रवाल की कहानी सिखाती है कि जीवन में मुश्किलें आती जरूर हैं, मगर जीत उसी की होती है, जो गिरकर बार–बार उठना जानता है.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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