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Sikar News: राजस्थान के सीकर जिले की प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीण माता को लेकर कहा जाता है कि यहां औरंगजेब ने भी नतमस्तक होकर क्षमा-अर्चना कर अपनी जान बचाई थी.
मंदिर पुजारी राहुल पाराशर ने बताया कि जब औरंगजेब हिंदू मंदिरों को अपनी सेना के साथ तोड़ रहे थे तब उन्होंने हर्ष पहाड़ी पर जीण माता के भाई हर्ष के मंदिर को तोड़कर जीण माता के मंदिर को तोड़ने का दुस्साहस किया था तब उससे क्रोधित होकर जीण माता के मंदिर में बनी भंवरों की रानी की सेना भंवरों ने औरंगजेब की सेना पर घात लगाकर हमला शुरू कर दिया था.
भंवरों के काटने से औरंगजेब और उसकी सेना गंभीर रूप से घायल हो गई और भागने लगी लेकिन भंवरों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. थक-हारकर औरंगजेब जीण माता की शरण में आया और नतमस्तक होकर आजीवन अखंड ज्योत जलाने का प्रण लिया.
इसके पश्चात जीणमाता ने भंवरों के रूद्र रूप को शांत किया और उसकी सेना को बचाया था. उसके बाद औरंगजेब यहां से लौट गया था. अखंड दीप जलाने का रिवाज आज भी जीण माता में लगातार जारी है, जिसका काजल लेने के लिए भी लोग यहां आते है.
जीण माता के मेले में हर समुदाय के लोग पहुंचते हैं और माता के दरबार में शीश नवाते हैं. जीण माता के मंदिर में अब तक लाखों श्रद्धालु धोक लगा चुके हैं और लगातार श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है.
कहानियों के अनुसार, जीण माता का जन्म राजस्थान के चूरू में घांघू गांव के एक राजघराने में हुआ था. मां शक्ति का अवतार मानी जाती हैं. उनके बड़े भाई हर्ष को भगवन शिव का अवतार माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि जीण माता के मंदिर के पट कभी बंद नहीं होते हैं और ग्रहण के दौरान भी जीण माता मंदिर में आरती समय पर होती है.
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