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Sikar News: राजस्थान के सीकर जिले में श्रीमाधोपुर क्षेत्र का देश की रक्षा के लिए समर्पित आईटीबीपी के जवान रतनलाल गुर्जर का उत्तराखंड के जाजरदेवल, पिथौरागढ़ में कर्तव्य निर्वहन के दौरान निधन हो गया था. जवान 14 वीं बटालियन आईटीबीपी में तैनात थे और बर्फीली पहाड़ियों में पेट्रोलिंग के दौरान ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए, उनकी शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी.
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शहीद रतनलाल गुर्जर का पार्थिव शरीर देर रात अजितगढ़ पुलिस थाना पहुंचा था, जहां से उन्हें उनके पैतृक गांव लौहिया चूडला (सांवलपुरा तंवरान) ले जाया गया. ग्रामीणों और जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए 30 किलोमीटर लंबी तिरंगा बाइक रैली निकाली. गांव में शहीद के सम्मान में सभी बाजार बंद रहे और लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी.
शहीद रतनलाल गुर्जर चार भाइयों में सबसे छोटे थे. उनके बड़े भाई रामपाल गुर्जर भी भारतीय सेना में सेवा देते हुए तीन साल 11 महीने पहले जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे. दो अन्य भाई मोहन गुर्जर और रोशन गुर्जर अपने पिता बीरबल गुर्जर के साथ खेती का कार्य करते हैं, उनकी माता आंची देवी गृहिणी हैं. रतनलाल का विवाह बलेश देवी (कोटपूतली) से हुआ था और उनके तीन छोटे बच्चे-तनु (8 वर्ष), बेटा यश (5 वर्ष) और काजू (2 वर्ष) हैं.
करीब एक माह पहले ही वह छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटे थे. जाते समय उन्होंने परिवार से वादा किया था कि 3 मई 2025 को अपने बड़े शहीद भाई की पुण्यतिथि पर घर लौटेंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. उनकी शहादत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया. मां और पत्नी बेसुध हो गईं, जिनका ढांढस बंधाने के लिए गांव की महिलाएं आगे आई. शहीद के अंतिम संस्कार के लिए सेना का वाहन फूलों से सजाया गया. पुलिस थाना अजितगढ़ से गांव तक हजारों की संख्या में ग्रामीण और युवा तिरंगा यात्रा में शामिल हुए.
भारत माता की जय, वंदे मातरम और अमर शहीद रतनलाल अमर रहें के नारों से समूचा इलाका गूंज उठा. गांव में पहुंचने पर पार्थिव देह को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़, विधानसभा प्रभारी अजय सिंह खर्रा, प्रधान शंकरलाल यादव, युवा कांग्रेस नेता कुणाल सिंह शेखावत सहित कई जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों की मांग अंतिम संस्कार से पहले ग्रामीणों में इसका विरोध देखने को मिला.
उन्होंने आईएएस स्तर के प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी, शहीद के परिवार को सरकारी सहायता पैकेज देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. करीब 15 मिनट बाद आपसी सहमति के बाद शहीद के बड़े भाई रामपाल गुर्जर के स्मारक स्थल के पास ही रतनलाल का अंतिम संस्कार किया गया. पुत्र ने दी मुखाग्नि, सेना ने किया. पांच वर्षीय पुत्र यश ने पिता को मुखाग्नि दी.
सेना के अधिकारियों ने शहीद के पिता बीरबल गुर्जर को तिरंगा सौंपा. गार्ड ऑफ ऑनर देकर सेना के जवानों ने अपने साथी को अंतिम विदाई दी. जनप्रतिनिधियों, सेना और पुलिस अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. पूरे गांव में रतनलाल की शहादत को सलाम किया गया. हर कोई उनकी वीरता और बलिदान पर गर्व महसूस कर रहा था.