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सिरोही: चपरासी के वेतनमान पर रिटायर हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, जानिए पूरा मामला

इस सुपर टाइम स्केल डॉक्टर एन के गोयल का रिटायरमेंट जिन परिस्थितियों एवं हालात में हुआ वह अपने आप में चौकाने वाला है.  

सिरोही: चपरासी के वेतनमान पर रिटायर हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, जानिए पूरा मामला
वह प्रिंसिपल सीएचएमओ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे.

माउंट आबू: माउंट आबू के सरकारी सामुदायिक केंद्र में पिछले 31 अगस्त 2018 को स्वास्थ्य विभाग के सुपर टाइम स्केल अधिकारी डॉक्टर एनके गोयल का रिटायरमेंट हुआ था. यह केवल एक सामान्य रिटायरमेंट की बात होती तो कोई खबर नहीं थी. लेकिन अब यह खबर इसलिए बन गई है कि इस सुपर टाइम स्केल डॉक्टर एन के गोयल का रिटायरमेंट जिन परिस्थितियों एवं हालात में हुआ वह अपने आप में चौकाने वाला है.  

देश व प्रदेश के जनता की सेहत व नब्ज के देखभाल करने का जिम्मा आज जिस स्वास्थ्य महकमे पर है, उसी स्वास्थ्य महकमे में काम करने वाले चिकित्सको की अपनी हालात कैसी है, इस घटना से इसकी पोल खुल रही है. रिटायरमेंट होने के बाद उन्हें पेंशन के लिए ही कितने पापड़ बेलने पड़ते है, कितना कुछ झेलना पड़ता है यह सब कुछ बयां हो रहा है. इसी स्वास्थ्य विभाग के एक निदेशक एवं माउंट आबू के रिटायर्ड सुपर टाइम स्केल अधिकारी डॉक्टर एन के गोयल विभाग के रवैये के शिकार है.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 की 30 अगस्त को माउंट आबू के सरकारी सामुदायिक केंद्र यानी सरकारी अस्पताल से सुपर टाइम स्केल यानी प्रिंसिपल सीएचएमओ के पद से डॉक्टर एनके गोयल सेवानिवृत्त हुए थे. जब वह सेवानिवृत्त हुए तब उनका वेतन बेसिक के रूप में 13600 रुपए का था जो कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के आसपास का था. डॉक्टर गोयल के रिटायरमेंट के समय तक ना तो फिक्सेशन हुआ ना ही सातवें वेतन आयोग का भी उन्हें कोई लाभ मिला.उसके बाद पेंशन के भी कोई परिणाम नहीं मिले.

वह पिछले 12 सालों से वे अपने इसी फिक्सेशन की लड़ाई के लिए चिकित्सा महकमे से लेकर प्रदेश के प्रशासन शासन सहित कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं. उनके अपने ही विभाग में उनके पत्रों व परिवेदनाओ पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यहां तक कि रिटायरमेंट के 4 महीने बाद जब उनसे स्थानीय एसडीएम ने जबरन उनका सरकारी क्वार्टर खाली करवाया. 

वहीं, उसके 1 माह बाद ही उन्हें सीवियर हार्ट अटैक आया था जिसके लिए उन्हें इलाज के लिए अहमदाबाद जाना पड़ा और वहां भी उनका 22 से अधिक लाख रुपये इसी इलाज में खर्च हो गया. इसमें दिलचस्प बात यह भी है कि जब उन्हें हार्ट अटैक आया एंबुलेंस के लिए उनके घरवालों ने 108 पर कई बार कॉल किया ना तो यहां के सरकारी अस्पताल से कोई एंबुलेंस आई और नहीं कोई उनकी सहायता के लिए कोई चिकित्सक या प्रभारी वहां पहुंचा.