रसजयोगिनी रतनमोहिनी के निधन पर दीया कुमारी ने जताया शोक, दादी को बताया प्रेरणा स्त्रोत

Brahma Kumari: ब्रह्माकुमारी की प्रमुख सजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने 101 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है. राजस्थान के आबू रोड में स्थित ब्रह्माकुमारीज के मुख्यालय शांतिवन में दर्शन के लिए आज उनके पार्थिव शरीर को रखा जाएगा. 

रसजयोगिनी रतनमोहिनी के निधन पर दीया कुमारी ने जताया शोक, दादी को बताया प्रेरणा स्त्रोत

Brahma Kumari: ब्रह्माकुमारी की प्रमुख रसजयोगिनी दादी रतनमोहिनी का निधन हो गया है. 101 साल की उम्र में सोमवार को रात 1 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. बीते काफी दिनों से वह अस्वस्थ थीं और अहमदाबाद के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. दादी रतनमोहिनी के पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह आबू रोड पर बने ब्रह्माकुमारीज के मुख्यालय शांतिवन में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा.

दादी के निधन पर राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने शोक व्यक्त किया है. दीया कुमारी ने कहा दादी का जीवन और समाज के उत्थान में उनका योगदान प्ररेणा का स्रोत है. ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और शोक संतप्त अनुयायियों को दुख की इस घडी में संबल प्रदान करें.

ब्रह्माकुमारीज के मुख्यालय ने खबर की पुष्टि करते हुए फेसबुक पर लिखा- 'हमारी परम आदरणीय, मां समान राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी ने आध्यात्मिक सेवा के जीवन के बाद 101 साल की उम्र में सूक्ष्म लोक में प्रवेश किया है. हम उनकी दिव्य उपस्थिति और शुद्ध कंपन आध्यात्मिक पथ को रोशन हमेशा करते रहेंगे. ह लाखों लोगों का मार्गदर्शन करते रहने वाले हैं. प्रेम, सादगी और उच्च दृष्टि की उनकी विरासत हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेगी. दादी जी 2021 से ब्रह्माकुमारीज की प्रशासनिक प्रमुख थीं.'

बता दें कि दादी का जन्म 25 मार्च 1925 को हैदराबाद, सिंध, जो आज के समय में पाकिस्तान में हैं, में हुआ था. उनका नाम असल नाम लक्ष्मी था. 13 वर्ष की छोटी सी आयु में वे ब्रह्मकुमारी संस्थान से जुड गई थी. बचपन से ही उनकी अध्यात्म की तरफ रुचि थी. दादी ने संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

दादी रतनमोहिनी जीवन के अंतिम दिनों तक संस्था के कामों में सक्रिय रही. वे प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर रात 10 बजे तक ईश्वरीय सेवाओं करती रहती थी. उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रचार के लिए कई पदयात्राएं भी की है. 1985 में उन्होंने 13 पदयात्राएं और 2006 में 31 हजार किलोमीटर की यात्रा की थी. अब तक उन्होंने 70 हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की थी.

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