कोटा में जिला अधिकारी की खास पहल, दिव्यांग बच्चों के लिए किया कुछ ऐसा...

जिला कलक्टर ओम कसेरा की पहल पर पहली बार इस आयोजित कार्यक्रम में 600 से अधिक बच्चों ने तुलिका पकड़कर अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारा.

कोटा में जिला अधिकारी की खास पहल, दिव्यांग बच्चों के लिए किया कुछ ऐसा...
इस कार्यक्रम में 600 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया.

कोटा: विश्व के सात अजूबों को निहारते हुए अपनी छिपी भावनाओं को रंगों के माध्यम से उकेरने का अवसर पाकर शहर के 600 से ज्यादा मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चे चहक उठे. मौका था जिला प्रशासन, नगर विकास न्यास एवं सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के समन्वय से दिव्यांग दिवस का.

जिला अधिकारी ओम कसेरा की पहल पर पहली बार इस आयोजित कार्यक्रम में 600 से अधिक बच्चों ने तुलिका पकड़कर अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारा. सेवन वडर्स पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम में 600 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. वहीं, इस आयोजन में विद्यार्थियों ने एक साथ तुलिका पकड़ कर अपनी भवनाओं को चित्रों के माध्यम से अपने-अपने अंदाज में वयक्त किया. 

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कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों के अलावा राजकीय महाविद्यालय एवं अन्य संस्थाओं के छात्र भी उपस्थित रहे. विश्व के सात अजूबों के पास अलग अलग-अलग स्थानों पर बैठकर एक साथ अपनी भावनाओं को वयक्त करने का मौका पाकर प्रत्येक दिव्यांग बच्चे में खासा उत्साह देखने को मिला.

चित्रों में वयक्त किए विचार
प्रशासन द्वारा चित्रकारी के लिए कोई विषय तय नहीं किया गया था, लेकिन दिव्यांग बच्चों में अलग-अलग विषयों पर चित्रकारी कर सामाजिक, पर्यावरण एवं तात्कालिक समस्याओं को बखूबी व्यक्त किया. मूक-बधिर बच्चे चाहे समाज को बोलकर अपनी बात नहीं रख पाते हों लेकिन जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में चित्रों के द्वारा प्रत्येक बच्चे ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया. 

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यहां तक कि छात्रों ने वनों की सुरक्षा, पेड़ बचाने, बालिका शिक्षा व सुरक्षा, धरोहरों के संरक्षण एवं प्रकृति के मनोहारी चित्रण भी बच्चों द्वारा व्यक्त किए. वहीं, एक बालिका ने जिला कलक्टर को पोट्रेट चित्र बनाकर प्रस्तुत किया। दिव्यांग बच्चों ने प्रशासन की पहल पर पहलीबार सात अजूबे देखकर उल्लास मनाया. 

दिव्यांगों के लिए प्रेरक बने जिला अधिकारी
जिला अधिकारी ओम कसेरा ने कहा कि दिव्यांग जन समाज को प्रेरणा एवं दिशा देने का कार्य करते हैं. शारीरिक अक्षमता के बावजूद जिस प्रकार पूरी दक्षता के साथ अपनी भावनाओं एवं विचारों को रखते है उससे शिक्षा लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार थे कि समाज में सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए उसी से प्रेरित होकर यह कार्यक्रम रखा गया है. 

दिव्यांग बच्चे अपनी खुश का इजहार कर सकें, अपनी कलात्मकता को प्रदर्शित कर सकें यही प्रशासन का उद्देश्य है. उन्होंने प्रत्येक संस्थावार 5-5 बच्चों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया तथा उनके बीच जाकर आत्मीयता से मिलकर रूबरू हुए. साथ ही, बच्चों ने भी जिला अधिकारी की पहल का संकेतो के माध्यम से इजहार कर खुशी जाहिर की.