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कोटा: अब सुसाइड नहीं करेंगे कोचिंग सेंटर्स के बच्चे, राजस्थान सरकार कर रही ये काम

कोटा शहर अब शिक्षा नगरी के नाम से जाना जाने लगा है. यहां के कोचिंग सेंटर से पढ़ने वाले हजारों बच्चों ने आईआईटी (IIT) और मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा में सफलता हासिल की है.

कोटा: अब सुसाइड नहीं करेंगे कोचिंग सेंटर्स के बच्चे, राजस्थान सरकार कर रही ये काम
प्रतीकात्मक तस्वीर.

कोटा: देश की एजुकेशन सिटी कोटा (Kota) है लेकिन यहां लगातार कोचिंग छात्रों की खुदकुशी के बढ़ते मामले और छात्रों में बढ़ता डिप्रेशन (Depression) चिंता का विषय है. अब राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने कोचिंग संस्थानों पर लगाम लगाने की रणनीति के साथ एक कदम आगे बढ़ाया है. प्रदेश सरकार कोचिंग संस्थाओं के लिए एक कमेटी बनाकर कानून लाने जा रही है ताकि फालतू कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा कसा जा सके.

कोटा शहर अब शिक्षा नगरी के नाम से जाना जाने लगा है. यहां के कोचिंग सेंटर से पढ़ने वाले हजारों बच्चों ने आईआईटी (IIT) और मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा में सफलता हासिल की है. इसके साथ ही कोटा पर एक दाग है, जिसमें यहां आने वाले बच्चों के डिप्रेशन (Depression) में जाकर सुसाइड कर लेने के मामले भी सामने आते रहे हैं. 

ऐसे में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) ने कहा है कि कोचिंग संस्थान को संचालित करने के लिए एक पॉलिसी राजस्थान में जल्द ही लेकर आ रहे हैं. इसके तहत कोचिंग सेंटर कैसे संचालित होंगे, किस प्रकार से उनकी फीस होगी, कैसे बच्चे का एडमिशन देंगे, किस तरह से स्क्रीन टेस्ट उनका लेना होगा, किस तरह से बच्चे की काउंसलिंग करनी होगी, यह सब चीजें उसमें शामिल होंगी ताकि बच्चे डिप्रेशन के शिकार न हों.

आगे मंत्री डोटासरा ने कहा कि उसके लिए कानून हम जल्द ही बना रहे हैं. इसके साथ यह भी निर्धारित किया जाएगा कि किस एरिया में कोचिंग सेंटर होना चाहिए, वहां पर क्या क्या सुविधाएं स्थापित की जानी चाहिए, बच्चों को कोचिंग सेंटर में क्या सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे, बच्चे के बीमार होने पर हॉस्पिटल की सुविधा किस तरह से मिलेगी, ये सब चीजें इस कानून में समाहित होंगी. इसे जल्द ही लेकर आएंगे ताकि कोटा के कोचिंग संस्थानों में होने वाले सुसाइड पर रोक लगाई जा सके और बच्चे डिप्रेशन में नहीं आए.

ऐसे में प्रदेश सरकार अगर कानून लाती है तो न केवल बेलगाम कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा कसेगा बल्कि कोचिंग छात्रों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ रुकेगा. साथ ही कोचिंग छात्रों के आत्महत्या के मामले भी कम हो सकेंगे.