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Rajasthan Crime: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले और आस-पास के इलाकों में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के रंगदारी वसूली के बड़े नेटवर्क का एसपी ड़ॉ. अमृता दुहन खुलासा करेगी. यह गैंग जोधपुर से पंजाब तक विदेश बैठे सदस्यों के जरिए धमकियां देकर करोड़ों की फिरौती वसूलता था. पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं. मामले की गंभीरता देखते हुए श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर और बीकानेर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जांच सौंपी गई है.
91 लाख रुपये नगद बरामद
जांच में पता चला कि जोधपुर से करीब 1 करोड़ रुपये की रंगदारी की रकम रायसिंहनगर लाई जा रही थी. इसी बीच पुलिस ने रायसिंहनगर क्षेत्र में एक लग्जरी कार से 91 लाख रुपये नगद बरामद कर लिए. कार में सवार तीन युवक सिर्फ कैरियर थे, जिन्हें यह रकम रायसिंहनगर के पास एक गांव में किसी युवक तक पहुंचानी थी. यह रकम आगे पंजाब भेजी जानी थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता से बड़ा खुलासा हो गया.
पुलिस के मुताबिक, विदेश में बैठे गैंग सदस्य धमकियां दिलवाते थे और रकम वसूलते थे. 29 दिसंबर की रात गश्त के दौरान श्रीविजयनगर रोड पर लग्जरी कार रोकी गई. कार शहर के एक टेलर की बताई जा रही है. एएसआई जगतार सिंह के नेतृत्व में टीम ने तीनों युवकों को हिरासत में लिया. युवकों से रकम के स्रोत पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
जांच आगे बढ़ी तो फाजिल्का, जोधपुर, रायसिंहनगर के सावंतसर और कामावास गांव और हनुमानगढ़ के कई संदिग्धों को पकड़ा गया. मंगलवार शाम तक कुल सात युवकों से गहन पूछताछ की गई.
रायसिंहनगर थाने में नो एंट्री लगा
विभिन्न जिलों के अधिकारी और जांच एजेंसियां मौजूद होने से आम फरियादी बाहर ही सुने गए. पुलिस अब आयकर विभाग समेत अन्य एजेंसियों से संयुक्त पूछताछ की तैयारी कर रही है. यह कार्रवाई लॉरेंस गैंग पर राजस्थान पुलिस के लगातार शिकंजे का हिस्सा है. गैंग का नेटवर्क रंगदारी, फायरिंग और धमकियों से दहशत फैलाता रहा है.
एसपी अमृता दुहन ने पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 29 दिसंबर की रात को रायसिंहनगर पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान इनोवा क्रिस्टा गाड़ी में सवार तीन आरोपियों को रोककर पूछताछ की. जब आरोपियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो उनकी गाड़ी चेक की गई. गाड़ी में तीन बैग रखे हुए थे, जिनमें से 91 लाख रुपए बरामद हुए.
व्यापारियों को जान से मारने की धमकी
इसके बाद पुलिस ने आरोपी कुलदीप कुमार (50), अमन कुमार (20) व रामस्वरूप (38) को डिटेन किया. साथ ही गाड़ी भी जब्त कर ली गई. पुलिस इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि आरोपी व्यापारियों को जान से मारने की धमकी देकर रंगदारी वसूलते थे और रकम को ऑनलाइन-ऑफलाइन माध्यमों से गैंग तक पहुंचाते थे. इस पैसे का इस्तेमाल हथियार खरीदने और फरारी काटने में होता था.
पुलिस इन्वेस्टिगेशन में आरोपी कुलदीप ने पुलिस को बताया कि उसके बेटे योगेश ने उसको कहा था कि जोधपुर से एक जयराम जांदू नाम के एक शख्स से पैसे लेकर आने हैं, जिसके बाद कुलदीप के साथ रामस्वरूप, अमन और सूरतगढ़ से घनश्याम पैसे लेने जोधपुर गए थे, जिसके बाद पुलिस ने योगेश को डिटेन किया.
पूछताछ में योगेश ने बताया कि उसने अबोहर के रहने वाले साहिल बिश्नोई उर्फ शंटी के कहने पर पैसे लेने जोधपुर भेजा था. पुलिस ने साहिल बिश्नोई की हिस्ट्री खंगाली। जिसमें पता चला कि साहिल बिश्नोई, गैंगस्टर अंकित भादू का काफी क्लोज रहा है. 6 दिसंबर 2018 में श्रीगंगानगर जिले के लालगढ़ जाटान में पंकज सोनी मर्डर हुआ था, उसमें आरजू बिश्नोई और साहिल बिश्नोई उर्फ शंटी एक जेल में बंद थे. इसी समय कुलदीप का भांजा अक्षय भी जेल में बंद था. जेल में तीनों की अच्छी जान-पहचान हो गई और दोस्त बन गए.
साल 2024 में दिल्ली पुलिस द्वारा शंटी को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया गया था तब वह जमानत पर जेल से बाहर आया और फरार हो गया. अक्षय और शंटी लगातार आरजू बिश्नोई के संपर्क में थे, जो रंगदारी से जो भी पैसा आता है, पैसे को कहां से कलेक्ट करना है वह योगेश को बताते थे. योगेश और कुलदीप और लोकेशन पर जाकर वह पैसा कलेक्ट कर लेकर आते थे. इसके बाद इस पैसे को अलग-अलग राज्यों में गैंगस्टर को वितरित करते थे.
एसपी ने बताया कि राज्यभर में यह पहली ऐसी कार्रवाई है, जो आर्थिक संगठित अपराध के खिलाफ हुई है. इस चैन तक पुलिस पहली बार पहुंची है. इससे पहले गैंगस्टर और अपराधियों को गिरफ्तार किया जाता था लेकिन आर्थिक रूप से इस चैन तक पुलिस पहली बार पहुंची है. पुलिस ने शंटी के बहनोई मनीष बिश्नोई को भी डिटेन कर रखा है, जिससे बड़े खुलासे हो रहे हैं.
एसपी ने बताया कि आरोपियों के पास यह पैसा यूएसडीटी के माध्यम से गंगानगर-हनुमानगढ़ और हरियाणा के इसी चैनल के माध्यम से आता था. आरोपी गरीब लोगों के नाम पर म्युल अकाउंट्स खुलवा लेते हैं और बाद में यूएसटीडी खरीद लेते. इसके बाद यूएसटीडी को बेच देते हैं और कैश प्राप्त कर लेते हैं. पैसे का लेनदेन करवाने के लिए आरोपी ऐसे लोगों को चुनते जिनके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हो और पुलिस को भी कोई शक न हो.
गैंग का तरीका-ए-वारदात
जांच में पता चला कि गैंग के सदस्य साहिल उर्फ शंटी और अक्षय कुमार, आरजू बिश्नोई व लॉरेंस गैंग के लिए काम करते हैं. ये लोग व्यापारियों को जान का खतरा बताकर फिरौती वसूलते और रकम कुलदीप कुमार व योगेश तक पहुंचाते. फिर यह पैसा मनीष बिश्नोई जैसे माध्यमों से जोधपुर से लाकर गैंग तक ट्रांसफर किया जाता. गिरफ्तार आरोपी इस चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा थे.
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