'उड़ता पंजाब' बना राजस्थान का श्रीगंगानगर, अफीम-पोस्त के बाद युवाओं को लगी इसकी लत...

नशे की गिरफ्त में आए युवकों के परिजनों की हालत काफी चिंताजनक होती है क्योंकि वे अपने खून को नशे से बर्बाद होते हुए अपनी लाचार आंखों से देखते हैं. 

'उड़ता पंजाब' बना राजस्थान का श्रीगंगानगर, अफीम-पोस्त के बाद युवाओं को लगी इसकी लत...
प्रतीकात्मक तस्वीर.

कुलदीप गोयल, श्रीगंगानगर: जिस नशे ने पंजाब के युवा वर्ग को जकड़ रखा है, वही, नशा अब राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के युवा वर्ग की नसों में भी घुलने लगा है. पाकिस्तान से हेरोइन तस्करी के लिए पंजाब बदनाम है और इन तस्करों ने पंजाब से साथ लगते जिले श्रीगंगानगर में भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. 

अफीम और पोस्त के बाद अब चिट्टे (हेरोइन), स्मैक और मेडिकेटेड टेबलेट्स जैसे नशे ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. बीकानेर संभाग में नशे के मामले में श्रीगंगानगर पहले, हनुमानगढ़ दूसरे, बीकानेर तीसरे और चूरू चौथे नंबर पर है. यह नशा पंजाब, हिमाचल और दिल्ली जैसे राज्यों से श्रीगंगानगर में पहुंचता है.

सोलह साल की कम उम्र से ही युवक इस नशे के आदी हो रहे हैं हालांकि बीस से तीस साल के युवा नशे की गिरफ्त में ज्यादा हैं. यार दोस्तों के साथ युवा वर्ग इस नशे की गिरफ्त में आना शुरू होता है और धीरे धीरे इस नशे के जाल में ऐसा फंसता है कि उसका निकलना मुश्किल हो जाता है. हमने नशे की गिरफ्त में आये कुछ युवाओं से बात की तो उन्होंने बताया कि वे पिछले दस से पंद्रह सालों से नशा करते आ रहे हैं. शुरुआत में शराब, फिर अफीम, फिर पोस्त, फिर नशीली गोलियां और फिर स्मैक और अब चिट्टे का नशा करने लगे.

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जानकार हैरानी होगी कि नशा करने के लिए प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये की जरूरत होती है, जिसके लिए वे शुरुआत में तो घर से रुपये लेते थे लेकिन जब नशे के कारण घर बर्बाद होने लगा और रुपये ख़त्म हुए तो उन्होंने घर का सामान बेचना शुरू कर दिया. इसके साथ लोगो के साथ लूटपाट, चोरी, ठगी और रिश्तेदारों से रुपये मांगना शुरू कर दिया, जिसके लिए कई बार उन्हें जेल तक जाना पड़ा. वहीं, समाज में खुद के साथ साथ परिवार की भी बदनामी हुई.

ग्रेजुएटेड हैं नशे के आदी युवक
एक युवक ने बताया कि उसके पिता फ़ौज में सूबेदार थे, इस कारण उसे फ़ौज में भी जॉब मिली लेकिन नशे के कारण उसने जॉब छोड़ दी, फिर उसे पुलिस में जॉब मिली लेकिन वह भी छोड़ दी, खुद का कारोबार भी तबाह कर लिया. एक युवक ने बताया कि नशा नहीं मिलने पर शरीर में बहुत दिक्कत महसूस होती है. नशे की गिरफ्त में आये युवा मानते हैं कि नशे के कारण उनका सब कुछ तबाह हो गया. हैरानी की बात है कि सब युवा अच्छे घरो से है और ग्रेजुएशन से ज्यादा पढ़े लिखे हैं.

परिजनों को भी होती है फिक्र
नशे की गिरफ्त में आए युवकों के परिजनों की हालत काफी चिंताजनक होती है क्योंकि वे अपने खून को नशे से बर्बाद होते हुए अपनी लाचार आंखों से देखते हैं. नशा नहीं मिलने पर जब उनका बेटा दर्द से कराहता है तो मां-बाप के सीने पर खंजर की तरह चोट लगती है. बहुत बार नशेड़ी अपने माता-पिता को पीट देता है, अपनी पत्नी को पीट देता है, घर से समान बेच देता है और बाहर चोरियां करता है, वहीं. नशा मुक्ति केन्द्रो के संचालकों का कहना है कि जब नशा छुड़वाने के लिए मरीज उनके पास आते हैं तो उनकी हालत काफी खराब होती है, अधिक देर से नशे कि गिरफ्तार में होने के कारण युवा वर्ग को दौरे पड़ रहे होते हैं, उन्हें अपने शरीर की सुध नहीं होती, कभी ब्रश किया तो कभी नहीं, कभी नहाया तो कभी नहीं, खाना नहीं खाते. एक जगह पड़े रहते हैं. उनका नशे के बगैर चलना फिरना मुश्किल होता है.

सीएम ने उठाया नशे के खिलाफ कदम
जिले का सादुलशहर कस्बा उत्तर भारत की सबसे बड़ी नशे की मंडी के रूप में जाना जाता था. सादुलशहर विधायक जगदीश ने नशे के खिलाफ प्रदेश की विधानसभा में कई बात मुद्दा उठाया है और प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत ने पूरे राजस्थान में नशे के खिलाफ अभियान की शुरुआत भी पिछले दिनों की थी.

चलाया जा रहा जन जागरूकता अभियान 
पिछले एक साल में श्रीगंगानगर जिला पुलिस ने NDPS एक्ट में 200 से ज्यादा मामले दर्ज करते हुए करीब 395 नशे के सौदागरो को गिरफ्तार किया है. वहीं, श्रीगंगानगर पुलिस द्वारा युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को रोकने और नशे के आदी लोगों को नशे के चंगुल से छुड़ाने के लिए पिछले कई सालों से जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. श्रीगंगानगर पुलिस द्वारा अब तक 48 इंडोर कैम्प और 990 आउटडोर कैम्प लगाए जा चुके हैं. इसके साथ साथ समाजसेवी संस्थाओं द्वारा भी नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता फैलाई जा रही है. शहीद भगत सिंह क्लब द्वारा पिछले कई समय से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. क्लब द्वारा नशे के खिलाफ सन्देश देने के लिए कई बार मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया है, वहीं, गांवों में भी जागरूकता फैलाई जा रही है.  

श्रीगंगानगर जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हो रही कार्रवाई और अवेयरनेस कैंप के बावजूद जिले में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति ने अब प्रशासन और समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है. कहीं ऐसा न हो कि धान के कटोरे के रूप में विख्यात राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला प्रदेश का उड़ता पंजाब बन जाए.