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राज्य सरकार ने स्थगित की झालावाड़ नगर परिषद की बैठक, पार्षदों ने किया विरोध

उधर वर्तमान कांग्रेस सभापति मनीष शुक्ला भी अब पूरे मामले पर अविश्वास प्रस्ताव के लिए एकजुट हुए कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं

राज्य सरकार ने स्थगित की झालावाड़ नगर परिषद की बैठक, पार्षदों ने किया विरोध
पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बैठक आयोजित किए जाने की मांग की है

झालावाड़: प्रदेश के झालावाड़ नगर परिषद सभापति के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शनिवार को होने वाली बैठक को राज्य सरकार द्वारा स्थगित किए जाने के कारण नगर परिषद की सियासत में उबाल आने लगा है. मंगलवार को सारे मामले को लेकर बीजेपी व कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों ने जिला कलेक्टर से मिल कर अपना रोष प्रकट किया और ज्ञापन देकर जल्द से जल्द अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बैठक आयोजित किए जाने की मांग की.

वहीं सारे मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों ने कहा कि झालावाड़ नगर परिषद के कांग्रेस व भाजपा के 28 से ज्यादा पार्षदों ने नगर परिषद सभापति मनीष शुक्ला के खिलाफ 1 माह पूर्व अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जिला कलेक्टर को पत्र दिया था. जिस पर नियमानुसार उन्हें एक माह में कार्रवाई करनी थी. लेकिन जब जिला कलेक्टर ने शनिवार की तारीख में इस बैठक को आयोजित किए जाने की घोषणा की, तभी 1 दिन पहले राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर इस बैठक को आगामी आदेश तक स्थगित करवा दिया.

जिसके बाद, इसे लेकर पार्षदों में गहरा रोष फैल गया, भाजपा व कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों ने इसे लोकतंत्र का गला घोटने वाला कदम बताया. वहीं इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर ने नियमानुसार कार्यवाही करने की बात कही और कहा की बैठक को लेकर आगामी फैसला प्रदेश सरकार को लेना है. ऐसे में उनकी ओर से नाराज कांग्रेस पार्षदों की बात प्रदेश सरकार तक पहुंचाई जाएगी लेकिन आगामी तारीख का फैसला वहीं से तय होगा.

उधर वर्तमान कांग्रेस सभापति मनीष शुक्ला भी अब पूरे मामले पर अविश्वास प्रस्ताव के लिए एकजुट हुए कांग्रेस और भाजपा पार्षदों से दो-दो हाथ करने को तैयार है. सभापति मनीष शुक्ला ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए एकजुट हुए सभी पार्षद भू माफियाओं से मिले हुए हैं. कांग्रेस पार्षद भी पार्टी विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं. लेकिन फिर भी विरोधियों के पास अविश्वास प्रस्ताव पारित करवाने हेतु पर्याप्त संख्या बल नहीं मिल पाएगा.

गौरतलब है कि झालावाड़ नगर परिषद में भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह जिले में कांग्रेस का बोर्ड बना था, लेकिन उसके बाद से ही कांग्रेसी पार्षदों में आपस में लगातार सिर फुटव्वल की नौबत आती रही. कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों का कहना था कि सभापति मनीष शुक्ला ने ढाई साल तक पद पर रहने का कांग्रेस पदाधिकारियों की मौजूदगी मे लिखित मे एग्रीमेंट किया था, लेकिन वे अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरा होने के बाद भी पद छोड़ने को राजी नहीं है.

ऐसे में कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों ने पार्टी के हर स्तर पर अपनी पीड़ा को रखा, लेकिन जब किसी भी स्तर पर उनको राहत नहीं मिली तो उन्होंने विपक्षी दल भाजपा के पार्षदों का सहारा लिया व नगर परिषद सभापति व उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए. लेकिन इस पर बैठक होने के 1 दिन पहले अचानक सरकार ने आदेश जारी कर इस बैठक को स्थगित कर दिया, जिससे पार्षदों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया.

उधर पूरे मामले को देखा जाए तो भाजपा भी कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती. लोकसभा चुनाव सिर पर है ऐसे में झालावाड़ नगर परिषद की उठापटक में नाराज कांग्रेस पार्षदों की मदद से यदि भाजपा सभापति की कुर्सी पर कब्जा करने में कामयाब हो जाती है, तो कहीं ना कहीं उसे लोकसभा चुनावों में शहरी मतदाताओं का और बड़ा लाभ मिल सकता है. नगर परिषद में कांग्रेसी बोर्ड का गठन भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था ऐसे में भाजपा नेता कांग्रेस बोर्ड के दौरान शहर के विकास को पिछड़ने का बहाना बनाकर भाजपा के लिए मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे.

वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस सरकार ने स्वायत शासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर बैठक को आगामी आदेश तक स्थगित कर फिलहाल तो पार्टी की फूट को रोकने का प्रयास कर लिया है. लेकिन क्या सरकार अविश्वास प्रस्ताव को लेकर होने वाली बैठक को लोकसभा चुनाव के मतदान तक स्थगित रख पाएगी? यह देखने वाली बात होगी. उधर अविश्वास प्रस्ताव के बाद सभापति पद किसी के भी हाथ में आए, लेकिन तब तक झालावाड़ शहर की जनता दोनों पार्टियों के बीच शहरी अव्यवस्थाओं से जरूर जूझती नजर आ रही है.