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कोटा: मरीज से मनमाने पैसे वसूली के मामले में दोनों पक्षों का बयान दर्ज, जानिए पूरा मामला

कोटा(Kota) के राधा कृष्णा अस्पताल(Radha Krishna Hospital) द्वारा प्रसव के नाम पर परिजनों से मनमानी राशि मांगने के मामले में कोटा सीएमएचओ ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं.

कोटा: मरीज से मनमाने पैसे वसूली के मामले में दोनों पक्षों का बयान दर्ज, जानिए पूरा मामला
कोटा का राधा कृष्ण ह़ॉस्पिटल.

मुकेश सोनी, कोटा: कोटा(Kota) के राधा कृष्णा अस्पताल(Radha Krishna Hospital) द्वारा प्रसव के नाम पर परिजनों से मनमानी राशि मांगने के मामले में कोटा सीएमएचओ ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं. इन बयानों से साफ जाहिर हो रहा है कि अस्पताल प्रबंधन झूठ बोल रहा है और तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहा है. 

दरअसल, राधा कृष्णा अस्पताल के डायरेक्टर ने एक वीडियो जारी कर अस्पताल प्रबंधन(Hospital Managment) का पक्ष रखा और दावा किया कि मरीज के परिजन को पहले की मरीज की स्थिति के बारे में बता दिया गया था. 

जानिए क्या कह रहा है हॉस्पिटल प्रबंधन
राधा कृष्णा अस्पताल के डायरेक्टर का दावा है कि प्रसूता के परिजन को खर्च के बारे में भी बता दिया गया था और प्रसूता के परिजनों की सहमति के बाद ही उसका ऑपरेशन किया गया. जिसमें करीब 60 हजार रुपये का खर्चा आया.

प्रसूता के परिजनों पर मारपीट का लगाया आरोप
अपने वीडियो में डायरेक्टर कमलेश अग्रवाल प्रसूता के परिजनों पर पैसे नहीं देने और लोगों को जुटाकर मारपीट करने का इल्जाम भी लगा रहे हैं. लेकिन, राधा कृष्णा अस्पताल में कार्यरत रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. लोकेश अस्पताल के समर्थन में एक बयान दिया. जिसमें उन्होंने करीब 20 हजार रुपये काउंटर पर जमा करवाने और बाकी के 40 हजार रुपये बाकी होने की बात कही है . डॉ. लोकेश कह रहे हैं कि प्रसूता के ठीक होने पर उसके परिजनों ने हंगामा कर दिया. डॉ. लोकेश यहां तक कह रहे हैं कि पैसे कम या ज्यादा अस्पताल के मालिक ही करेंगे.

बयान पोल खोलने के लिए काफी
राधा कृष्णा अस्पताल की ओर जारी किए ये दो बयान ही अस्पताल की पोल खोलने के लिए काफी हैं कि कैसे अस्पताल प्रबंधन अपने आपको को सही साबित करने में लगा है. मरीज द्वारा कितने पैसे अस्पताल में जमा करवाये गए, कितने पैसे बाकी रहे, इस बारे में अस्पताल प्रबंधन सही नहीं बता रहा है. 

कोटा सीएमएमओ का यह है कहना
जी मीडिया की टीम ने इस मामले की जांच करने वाले कोटा सीएमएचओ डॉ. भूपेन्द्र तंवर से बात की. जो अस्पताल प्रबंधन की दलीलों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. सीएमएचओ डॉ. तंवर कह रहे हैं कि जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को भेज दी जाएगी. लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि मरीज को अस्पताल प्रबंधन ने बिना पैसे लिए कैसे भर्ती कर लिया? जब प्रसूता का ऑपरेशन किया गया, तो पैसे क्यों नहीं मांगे गये ? अस्पताल प्रबंधन अपने एक बयान में 29 अक्टूबर को 10 हजार जमा कराने की बात कह रहा है. जबकि, अस्पताल का कर्मचारी 9 हजार रुपये जमा कराने की बात कह रहा है. यानि, अस्पताल प्रबंधन अलग अलग बयान जारी कर संदेश पैदा कर रहा है.

प्रसूता के परिजनों ने दो बार 25-25 हजार रुपये ऑनलाइन जमा कराए, इस बात को अस्पताल प्रबंधन क्यों छिपा रहा है ? प्रसूता के परिजनों ने जो पैसे ऑनलाइन जमा कराए, वो अस्पताल के अकाउंट में अस्पताल प्रबंधन ने क्यों नहीं जमा कराए ? CMHO भी कह रहे हैं, कि निजी अस्पताल भरा बिना पैसे लिए मरीज का इलाज कैसे कर सकता  है ? अस्पताल के डायरेक्टर ने मारपीट का इल्जाम लगाया है, लेकिन अगर मारपीट हुई है, तो उसका वीडियो क्यों नहीं है, FIR क्यों नहीं दर्ज कराई गई

प्रसूता के परिजन इलाज के नाम पर जमीन बेच चुके हैं, लेकिन, अस्पताल प्रबंधन बहाने बना रहा है और गलत बयानी कर रहा है. ऐसे में अब CMHO की रिपोर्ट जब कलेक्टर को भेजी जाएगी. उसके बाद ही पता चल पाएगा कि अस्पताल के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है .