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राजस्थान: सिलिकोसिस से पीड़ित मजदूरों के लिए राज्य सरकार सजग, उठाया ये कदम

अब राज्य सरकार इन मजदूरों के कल्याण के लिए नई नीति बनाने जा रही है. 

राजस्थान: सिलिकोसिस से पीड़ित मजदूरों के लिए राज्य सरकार सजग, उठाया ये कदम
राज्य के सामाजिक संगठनों ने सरकार को प्रस्ताव दिए हैं. (फाइल फोटो)

जयपुर: राज्य में सिलिकोसिस से पीड़ित मजदूरों की बढ़ती संख्या के बावजूद अभी तक इन मजदूरों के कल्याण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. अब राज्य सरकार इन मजदूरों के कल्याण के लिए नई नीति बनाने जा रही है.

आपको बता दें कि, प्रदेश के 10 जिलों में मजदूरों की संख्या करीब 20 हजार है. जिसमें 6300 श्रमिक इस बीमारी से पीड़ित है. लेकिन अभी तक इन श्रमिकों को किसी भी तरह की सहायता राशि राज्य सरकार से नहीं मिली है.

इसके अलावा राज्य में 17000 मजदूरों की अभी तक कोई स्क्रीनिंग नहीं हो पाई. राज्य के जोधपुर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, बूंदी, भीलवाड़ा, नागौर, अजमेर, सिरोही, उदयपुर में सिलिकोसिस से पीड़ित मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा है. 

मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में बनाई कमेटी ने सिलिकोसिस रोग से ग्रसित पीड़ितों के श्रमिकों और उनके परिवार को राहत देने पर सहमति जता दी है. इससे जुड़ी सचिवालय में हुई बैठक में सिलिकोसिस पीड़ित मजदूरों और उनके परिवार के कल्याण के लिए पॉलिसी के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है. जिसका कैबिनेट के जरिए अनुमोदन कराने का निर्णय लिया गया है.

सिलिकोसिस पीड़ितों के लिए पॉलिसी बनते ही उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता में बढ़ोत्तरी होगी. इसके साथ ही विभिन्न श्रमिक इकाईयों में भी उनके लिए सुविधाएं सुनिश्चित की जाएगी. वहीं, सरकार पॉलिसी में माइनिंग कारोबारियों पर भी नकेल कसने का प्रावधान कर सकता है.

वैसे राज्य के सामाजिक संगठनों ने सरकार को दो प्रस्ताव दिए हैं. जिसमें पहला माइनिंग कारखानों पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार मजदूरों को सुविधाएं नहीं मिलती है तो उन्हें तुरंत सीज करने का प्रावधान किया जाए. 

दूसरा, कारखानों में काम करने वाले मजूदरों को कारखाना मालिकों द्वारा भी मुआवजे की राशि उपलब्ध करवाई जानी चाहिए. इसके साथ ही ऐसे श्रमिक जो सिलिकोसिस रोग से पीड़ित हैं और अभी तक उन्हें राहत नहीं मिली है. उनके मामलों को इस महीने के अंत तक निपटाया जाए.