राजस्थान में क्यों आई 'बड़ी मछलियों की शामत'?

सीएम गहलोत ने बैठक में आश्वासन दिया है कि ट्रैप के बाद शिकायतकर्ता को दिक्कत नहीं आने देंगे. 

राजस्थान में क्यों आई 'बड़ी मछलियों की शामत'?
शिकायतकर्ता की पहचान कभी भी उजागर न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा.

जयपुर: राजस्थान में अब घूसखोरों की शामत आने वाली है. सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने उन सभी चेहरों को ये साफ संकेत दे दिए हैं, जो कहते हैं कि भ्रष्टाचार करने वालों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होता है.
राजस्थान की ACB यूं तो पहले से ही घूसखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है लेकिन बुधवार को सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद भ्रष्टाचार करने वाली बड़ी मछलियों की भी अब खैर नहीं है. 

सीएम गहलोत ने बैठक में आश्वासन दिया है कि ट्रैप के बाद शिकायतकर्ता को दिक्कत नहीं आने देंगे. विभाग में काम शिकायतकर्ता का नहीं रुकेगा. CVC और CVO के सिस्टम मजबूत होगा. इसके साथ ही एसीबी की संसाधनों की दिक्कतें दूर होंगी. आय से अधिक संपत्ति के मामलों का सर्वे होगा. शिकायतकर्ता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी होगा. शिकायतकर्ता की पहचान कभी भी उजागर न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा. 

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
एसीबी के डीजी डॉ. आलोक त्रिपाठी, एडीजी सौरभ श्रीवास्तव और आईजी दिनेश एमएन की, जिनके सुपरविजन में लगातार एसीबी बड़े-बड़े घूसखोरों को पकड़ती जा रही है, लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि ये बड़ी से बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए ACB को ये फ्री हैंड गहलोत सरकार ने दिया है. 

फिलहाल उद्देश्य साफ नजर आ रहा है कि राजस्थान में करप्शन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है. फिर चाहे किसी मंत्री या विधायक का आशीर्वाद प्राप्त सरकारी अधिकारी या निजी दलाल ही क्यों न हो?