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उदयपुर: जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर छात्र, प्रशासन बेखबर

घलकिया गांव में सरकारी स्कूल महज 10वीं तक का है. जिसकी वजह से 11वीं और 12वीं में पढ़ने के लिए ग्रामीण बच्चों को रोजाना  दूसरे गांव में जाना पड़ता है.

उदयपुर: जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर छात्र, प्रशासन बेखबर
11वीं और 12वीं में पढ़ने के लिए ग्रामीण बच्चें रोजाना अपनी जान जोखिम में डालते है.

अजय ओझा/उदयपुर: प्रदेश के जनजाति अंचल कहे जाने वाले बांसवाड़ा जिले का एक गांव ऐसा है जहां पर शिक्षा के कारण बच्चें अपनी जान जोखिम में डाल रहे है. हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर घलकिया ग्राम पंचायत के वाका गांव की. इस गांव में सरकारी स्कूल महज 10वीं तक का है. जहां 11वीं और 12वीं में पढ़ने के लिए ग्रामीण बच्चें रोजाना अपनी जान जोखिम में डाल रहे है. 

बता दें कि वाका और चिडियावासा गांव के बीच से कागदी नदी गुजर रही है. रोजाना इस गांव के 40 से अधिक छात्र व छात्राएं इन नदी के बहते पानी से वाका गांव से चिडियावासा गांव की सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते है. यह आज की समस्या नहीं है यह पिछले 10 सालों से यहां पर बच्चे 11वीं व 12वीं क्लास में पढ़ाई करने के लिए वाका गांव से चिडियावासा गांव की सरकारी स्कूल में पढ़ने जाने को मजबूर है. 

गांव के लोगों और बच्चों ने बताया की हमारे गांव की स्कूल को 12वीं तक कर दिया जाए तो इन बच्चों को इस समस्या से बचाया जा सकता है. वहीं अगर स्कूल क्रमोनत नहीं होता है तो कागदी नदी पर पुल निर्माण हो जाए. जिससे बच्चों को आने जाने में कोई परेशानी नहीं होगी. बच्चे इन नदी पर पुल नहीं होने के कारण मजबूरी में पानी के अंदर से होकर गुजर रहे है. 

वहीं अगर बच्चों को नदी से नहीं गुजरना है तो उनको करीब 6 किलोमीटर दूर से गुजर कर स्कूल जाना पड़ता है. जिस कारण से बच्चे शार्ट-कट में नदी से गुजर रहे हैं और अपनी जान जोखिम में डाल कर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं. वहीं जब बरसात का समय नहीं होता है तो नदी में पानी कम रहता है इसलिए बच्चों को कम परेशानी होती है. लेकिन बरसात के सीजन आता है तो नदी में पानी के तेज बहाव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

इतना ही नहीं नहीं से गुजरने के बाद बच्चों में जंगली जानवारों का डर भी बना हुआ रहता है. ग्रामिणों ने कई बार जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग व विधायक से इस नदी पर पुल बनाने और वाका स्कूल को क्रमोनत करने की मांग की. पर अब तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. जिस कारण से आज गांव के बच्चों को यह परेशानी उठानी पड़ रही है.