4 सूत्रीय मांगों को लेकर जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट के छात्रों ने शुरू की आर-पार की लड़ाई

स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने वाले करीब 200 से ज्यादा विद्यार्थी इस समय आंदोलन की राह पर हैं. 4 सूत्री मांगों को लेकर ये विद्यार्थी हर रोज कलात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 

4 सूत्रीय मांगों को लेकर जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट के छात्रों ने शुरू की आर-पार की लड़ाई
अपनी मांगों को लेकर इन विद्यार्थियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है.

जयपुर: राजधानी जयपुर के स्कूल ऑफ आर्ट में समस्याएं हैं की खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने वाले करीब 200 से ज्यादा विद्यार्थी इस समय आंदोलन की राह पर हैं. 4 सूत्री मांगों को लेकर ये विद्यार्थी हर रोज कलात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हैं. लेकिन ना तो इनकी उच्च शिक्षा विभाग सुन रहे हैं और ना ही सरकार. सुबह समय पर ये विद्यार्थी स्कूल तो पहुंच रहे हैं, लेकिन कक्षाओं के बहिष्कार के चलते ये विद्यार्थी बाहर बैठकर ही अपनी पढ़ाई करने लग गए हैं. 

वहीं, छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर कॉलेज परिसर के बाहर रंग-बिरंगी कैनवास और कागज पर तस्वीरें बनाने में जुटे हैं. स्कूल में पढ़ने वाले ये छात्र यहां कला में विशेष योग्यता हासिल करने के लिए उच्च अध्ययन कर रहे है. बीते करीब एक महीने से आंदोलन पर आए इन स्टूडेंट्स का विरोध कॉलेज आयुक्तालय और प्राचार्या से है. कॉलेज में कला के विशेषज्ञ शिक्षकों को लगाने और गैर ललित कला की प्राचार्या को हटाने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन किया जा रहा है. हर बार सिर्फ आश्वासन के बाद अब इन विद्यार्थियों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है. अब जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक इन विद्यार्थियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. 

जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने छात्र हर रोज नये-नये तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जता रहे हैं. वहीं, उच्च शिक्षा विभाग है कि सुनने को ही तैयार नहीं है. जिसके बाद इन विद्यार्थियों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है. स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने वाली कृतिका सोनी और हर्षित का कहना है कि 'विद्यार्थियों द्वारा की जा रही सभी मांगें वाजिब है. लेकिन उसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और तमाम मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई. उन्होंने समस्या समाधान का आश्वासन भी दिया, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया. वहीं, दूसरी उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी तो बात करने के लिए भी तैयार नहीं है'.

तीन महीने पहले भी अपनी इन्हीं मांगों को लेकर इन विद्यार्थियों ने आंदोलन कर स्कूल के ताला जता था. तब आयुक्तालय ने अन्य विषय के शिक्षकों को यहां से हटा दिया था. साथ ही, इतिहास विषय से ताल्लुक रखने वाली प्राचार्या आशा बागोटिया को यहां के बजाय आयुक्तालय में अस्थाई लगाया गया. लेकिन उनके बाद भी इतिहास विषय की ही शिक्षिका प्रतिभा यादव को चार्ज दिया गया. 

इस बीच आशा बागोटिया ने कोर्ट से आदेश लेकर दोबारा यहां प्राचार्य का काम-काज अपने हाथों ले लिया. लेकिन स्टूडेंट्स का कहना है कि ड्राइंग पेंटिंग ऐसा विषय है जहां प्राचार्य से लेकर शिक्षक फाइन आर्ट से होंगे तो उन्हें बेहतरीन शिक्षा मिल पाएगी. आंदोलन की राह पर डटे हुए इन विद्यार्थियों को अब पूर्व विद्यार्थियों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है. पूर्व छात्र संदीप का कहना है कि 'विद्यार्थियों की जायजा मांग है, लेकिन इन 4 मांगों को पूरा करने में भी उच्च शिक्षा विभाग पूरी तरह से विफल नजर आ रहा है'.

स्टूडेंट्स को एल्युमिनाई एसोसिएशन का भी समर्थन मिल गया है. बड़ी संख्या में वरिष्ठ कलाकार इन विद्यार्थियों के समर्थन में उतर कर विरोध में जुटे नजर आ रहे हैं. स्टूडेंट्स की मांगों को लेकर प्राचार्या आशा बागोटिया का कहना है कि 'सरकार द्वारा अपनी योग्यता से नियुक्त है. साथ ही, उन्हें कोर्ट ने भी इस संबंध में राहत दी गई है. पिछले दस सालों में नियुक्त अन्य विषयों के प्राचार्यों पर भी कभी कोई सवाल खड़ नहीं किए गए. फिर एकाएक आंदोलन क्यों किए जा रहे हैं. जबकि पिछले एक साल भी वे यहां यहां प्राचार्या रह चुकी हैं'.

हालांकि, स्टूडेंट्स की विषय विशेषज्ञ को लगाने की मांगों पर पूर्व में भी आयुक्तालय ने नए योग्य शिक्षकों की भर्ती जल्द किए जाने की बात कही थी. वहीं, अब दोबारा आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को लेकर फिर से आयुक्तालय को विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं. लेकिन दूसरी ओर, आंदोलन के चलते स्टूडेंट्स की पढाई भी चौपट हो रही है.