राजस्थान को हो रहे वित्तीय नुकसान को लेकर वित्त मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रतिनिधि के तौर पर मंत्री सुभाष गर्ग ने 6 राज्यों के वित्त मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधियों ने निर्मला सीतारमण के साथ बैठक कर जीएसटी के तहत क्षतिपूर्ति की बकाया राशि देने की मांगों का ज्ञापन सौंपा. 

राजस्थान को हो रहे वित्तीय नुकसान को लेकर वित्त मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
केंद्रीय स्तर पर की जीएसटी की संपूर्ण कलेक्शन रेट 3.72 परसेंट है

नई दिल्ली: राजस्थान (Rajasthan) के हिस्से का केंद्र सरकार पर नवंबर तक के जीएसटी के बकाया फंड को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. सुभाष गर्ग ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रतिनिधि के तौर पर मंत्री सुभाष गर्ग ने 6 राज्यों के वित्त मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधियों ने निर्मला सीतारमण के साथ बैठक कर जीएसटी के तहत क्षतिपूर्ति की बकाया राशि देने की मांगों का ज्ञापन सौंपा. प्रदेश की ओर से नवंबर तक क्षतिपूर्ति के चार हजार करोड़ और सीएसटी के भी चार हजार करोड़ रुपये (कुल आठ हजार करोड़) को जारी करने की मांग रखी, जिससे राजस्थान को हो रहे वित्तीय नुकसान की भरपाई की जा सके.

बैठक के बाद सुभाष गर्ग ने बताया कि राजस्थान के हिस्से का केंद्र सरकार पर जीएसटी के तहत क्षतिपूर्ति का सितंबर 2019 तक 3129 करोड़ रुपया बकाया है तथा यह राशि अक्टूबर-नवंबर को मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपये हो गई है, जिसके तुरंत रिलीज करने की मांग रखी गई है. इसी तरह केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) के तहत क्षतिपूर्ति का केंद्र सरकार पर बकाया 4000 करोड़ रुपये की राशि को भी जल्द से जल्द जारी करने की मांग की है.

केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बैठक के बाद गर्ग ने बताया कि जब से जीएसटी लागू किया गया है तब से जीएसटी के कानून में यह प्रावधान है कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि राज्यों की रेवेन्यू में क़ोई गिरावट होती है तो केंद्र सरकार ने गारंटी दी हुई है कि जो रेवेन्यू का नुकसान राज्यों को होगा उसके  अगेंस्ट 14% गारंटेड रेवेन्यू ग्रोथ केंद्र सरकार देगी. इसी गारंटेड रेवेन्यू के तहत मिलने वाली क्षतिपूर्ति का केंद्र सरकार पर जी.एस.टी. के तहत अब तक 4000 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है.

क्षतिपूर्ति की कोई राशि जारी नहीं की है
गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार के पास 'सेस' लगाने से जो आय होती है, उससे केंद्र सरकार के पास करीब 50 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा हो चुका है बावजूद इसके अभी तक केंद्र सरकार ने किसी भी राज्य को जीएसटी के लागू करने से जो रेवेन्यू का नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति की कोई राशि जारी नहीं की है. यही वजह है कि आज 6 राज्यों के वित्त मंत्रियों और संबंधित मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर राज्यों की वित्तीय समस्याओं से विस्तार से अवगत करवाया है.

गर्ग ने कहा कि राज्यों की उधारी की लिमिट भी काफी बढ़ चुकी है और उसको चुकाने के लिए राज्यों के पास कमाई के संसाधन भी कम है. डॉ. गर्ग ने कहा कि जीएसटी लगने के बाद राज्य केंद्र सरकार पर निर्भर हो चुके हैं. ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द एक तो जीएसटी के तहत बकाया पैसा रिलीज किया जाए और जीएसटी के तहत जो कलेक्शन हो रहा है, उसमें से केंद्र राज्यों का बकाया पैसा समय पर राज्यों को हस्तांतरित करें ताकि राज्य अपने वित्तीय कार्य ठीक से कर सकें.

राज्यों को अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं की गई है
केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) के बारे में गर्ग ने कहा कि जब जीएसटी लागू किया गया था तब सीएसटी का रेट 4 परसेंट था उसे घटाकर 3 परसेंट किया गया. फिर 2 परसेंट कर दिया गया उस वक्त राज्यों से केंद्र सरकार द्वारा यह कहा गया था कि टैक्स रेट कम करने से राज्यों को रेवेन्यू का जो नुकसान होगा. उसकी क्षतिपूर्ति की जाएगी परंतु राज्यों को अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं की गई है... गर्ग ने कहा कि राजस्थान ऐसा राज्य है, जहां भौगोलिक परिस्थितियां काफी विकट है, राज्य का काफी हिस्सा रेगिस्तान का है तथा आए दिन अकाल से दिक्कतें होती हैं कई बार बाढ़ भी आ जाती है. सरकार पर लगातार सामाजिक जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं. वेलफेयर स्कीम्स पर राजस्थान सरकार बहुत संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. ऐसे में राजस्थान सरकार को वित्तीय संसाधनों की बहुत ज्यादा जरूरत है, जिस पर केंद्र सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए. 

जीएसटी के कलेक्शन को लेकर राजस्थान का प्रदर्शन बहुत बेहतर
उन्होंने बताया कि जीएसटी के कलेक्शन को लेकर राजस्थान का प्रदर्शन बहुत बेहतर है. केंद्रीय स्तर पर की जीएसटी की संपूर्ण कलेक्शन रेट 3.72 परसेंट है, वहीं राजस्थान की कलेक्शन ग्रोथ रेट 14 से 15% के करीब है. इसके बावजूद राजस्थान को केंद्र सरकार की ओर से कोई विशेष आर्थिक सहयोग नहीं दी जा रहा है. गर्ग ने मांग रखी कि ऐसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को तो अतिरिक्त वित्तीय सहयोग केंद्र सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए.

इनके अलावा प्रदेश की ओर से अन्य प्रमुख मांगों पर गर्ग ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य वित्तीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्तर पर एक "ग्रीवेंसेज मैकेनिज़्म" डेवलप किया जाना चाहिए ताकि केंद्र - राज्यों के वित्तीय संबंधों को लेकर राज्यों की जो शिकायत और जरूरत होती है उनको इस स्तर पर बेहतर तरीके से सकारात्मकता के साथ सुना और सुलझाया जा सके.