सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पंचायतों के पुनर्गठन मामले में राजस्थान सरकार को दी राहत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार AG की सलाह से चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पंचायतों के पुनर्गठन की तस्वीर साफ करेगी.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पंचायतों के पुनर्गठन मामले में राजस्थान सरकार को दी राहत
सुप्रीम ने माना कि पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन करना सरकार का अधिकार है.

मनोहर, नई दिल्ली: पंचायतों के पुनर्गठन मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को बड़ी राहत प्रदान की है. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक लगा दी है. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार AG की सलाह से चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पंचायतों के पुनर्गठन की तस्वीर साफ करेगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान में 204 नई पंचायत और 9 पंचायत समितियों के पुनर्गठन का रास्ता साफ हो जाएगा. हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगने के बाद नवगठित पंचायत समितियों के जल्द चुनाव हो सकते हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 15 नवंबर के बाद पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन को लेकर सरकार की ओर से जारी की गई सभी अधिसूचनाएं अवैध है. इस फैसले को राजस्थान सरकार के एएजी मनीष सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर चुनौती दी थी.

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बाद पंचायतों के पुनर्गठन का मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा था लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी. इससे राज्य सरकार को बड़ी राहत मिल गई है. राजस्थान हाईकोर्ट के वकील अजय कुमार मीणा का कहना है कि हमने हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर की थी. सुप्रीम ने हमारी दलील को सही माना. 

मीणा का कहना है कि सुप्रीम ने माना कि पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन करना सरकार का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चाकसू विधायक सोलंकी ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हमने कई कानून विशेषज्ञों से राय ली. अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहरा दिया है. जल्दी ही इन पंचायत समितयों और पंचायतों के चुनाव करवाए जाएंगे.

फैसले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है लेकिन सरकार ने जिस मंशा पर इंटेंशन से पंचायत और पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया, कतई प्रक्रिया उचित नहीं थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है तो अब जल्द ही पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव होंगे.