बांसवाड़ा की पैड वुमन हैं स्वाति, गांव-गांव जाकर दे रहीं सेनेटरी पैड बनाने की फ्री ट्रेनिंग

स्पर्श सेवा संस्थान की सदस्य स्वाति जैन अपने पति संदीप त्रिपाठी के साथ मिलकर इन दिनों गांव-गांव जाकर महिलाओं को रियूसेबल निशुल्क सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं. 

बांसवाड़ा की पैड वुमन हैं स्वाति, गांव-गांव जाकर दे रहीं सेनेटरी पैड बनाने की फ्री ट्रेनिंग
लगातार दो सालों से स्वाति स्कूलों, हॉस्टलों और गांव में जाकर महिलाओं को पैड बनाना सिखा रही हैं.

अजय ओझा, बांसवाड़ा: प्रदेश के जनजाति अंचल कहे जाने वाले बांसवाड़ा जिले में इन दिनों एक महिला पैड वुमन के नाम से मशहूर हो रही है. जी हां, बात कर रहे हैं शहर की मोहन कॉलोनी निवासी स्वाति जैन की.

स्पर्श सेवा संस्थान की सदस्य स्वाति जैन अपने पति संदीप त्रिपाठी के साथ मिलकर इन दिनों गांव-गांव जाकर महिलाओं को रियूसेबल निशुल्क सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं. 

स्वाति ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और युवतियों में शिक्षा के अभाव और गरीबी के कारण माहवारी में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है. इस कारण से माहवारी के समय इनको कई बार रोग भी लग जाते हैं. 

साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में महावारी में इस्तेमाल करने वाले प्रोडक्ट पहुंचते भी नहीं हैं. जहां पर पहुंचते हैं तो उनको खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते हैं. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए स्वाति ने अपने पति के साथ मिलकर गांव-गांव जाकर महिलाओं और बालिकाओं को रियूसेबल निशुल्क सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया. 

दो सालों से जारी है मुहिम
लगातार दो सालों से स्वाति स्कूलों, हॉस्टलों और गांव में जाकर महिलाओं को पैड बनाना सिखा रही हैं. अबतक स्वाति ने जिले में 4 हजार महिलाओं को सेनेटरी पैड बनाना सिखा दिया है. वहीं, अबतक 1700 से अधिक पैड निशुल्क बांट चुकी हैं. स्वाति ने बताया कि यह अभियान में लगातार जारी रखूंगी. इस सेनेटरी पैड के बारे में जब स्वाति से पूछा तो उनका कहना था कि पहले मैंने खुद इस पैड को घर पर बनाया और यूज किया. उसके बाद मैं लगातार इसे बनाने लगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और युवतियों को बांटने लगी.

धीरे-धीरे मैंने 1700 पैड बांटे. फिर सोचा कि क्यों न में इन महिलाओं और युवतियों को पैड बनाना सिखा दूं. फिर एक हॉस्टल से इस अभियान की शुरूआत की. जिले के अधिकतर बालिका हॉस्टल में जाकर मैंने पैड बनाने का प्रशिक्षण दिया. वहीं, गांवों में भी जाकर प्रशिक्षण दिया, जिसके बाद आज जिले में चार हजार से अधिक महिलाएं और युवतियां घर पर ही सेनेटरी पैड बनाना सीख गई हैं. वो सीखी हुई महिलाएं दूसरों को भी यह पैड बनाना सिखा रही हैं. 

स्वाति के इस अभियान से जिले में कई महिलाओं और युवतियों को माहवारी के समय होने वाली परेशानीयों से राहत मिली है. अगर केंद्र और प्रदेश की सरकार स्वाति के इस कदम में साथ दे तो यह पूरे प्रदेश में इस अभियान को चला सकेंगी और महिलाओं को राहत मिलेगी.