जयपुर की मानसागर झील के बीच स्थित जल महल अपनी अनोखी बनावट के लिए मशहूर है. 5 मंजिला इस महल की 4 मंजिलें पानी में डूबी रहती हैं, जबकि केवल एक मंजिल दिखाई देती है. करीब 300 साल पुराना यह महल आज भी अपनी जल-रोधी वास्तुकला से लोगों को हैरान करता है.
आजादी से पहले राजस्थान को राजपूताना, मरू प्रदेश और राजवाड़ा जैसे नामों से जाना जाता था. 1949 में कई रियासतों को मिलाकर इसे राजस्थान नाम मिला. यह राज्य ढूंढाड़, मारवाड़, मेवाड़ और हाड़ौती जैसे क्षेत्रों से मिलकर बना है.
जयपुर मेट्रो ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कई अनोखे रिकॉर्ड बनाए. एशिया में पहली बार सड़क, एलिवेटेड रोड और मेट्रो का त्रिस्तरीय ढांचा समानांतर विकसित किया गया. कंटीलीवर तकनीक से बने स्टेशन और देश के सबसे शार्प मेट्रो कर्व ने इसे देश की सबसे खास मेट्रो में शामिल किया गया.
राजस्थान के सामान्य गांवों में घूमने के लिए कोई टिकट नहीं लगता. हालांकि चोखी ढाणी, हाथी गांव और सम-खूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर गतिविधियों, सफारी या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए शुल्क देना पड़ सकता है. टिकट और पैकेज के रेट समय-समय पर बदल सकते हैं.
राजस्थान में ‘पालर पानी’ यानी सीधे वर्षा से प्राप्त जल को सबसे शुद्ध माना जाता है. इसे पारंपरिक टांकों में संग्रहित किया जाता है. जल संरक्षण की इस अनूठी व्यवस्था ने रेगिस्तानी क्षेत्रों में सदियों तक लोगों की प्यास बुझाई और आज भी इसका महत्व बना हुआ है.
जोधपुर के मथानिया की लाल मिर्च अपने तीखे स्वाद और गहरे लाल रंग के लिए मशहूर है. यह न केवल राजस्थान बल्कि विदेशों तक निर्यात होती है. पारंपरिक खेती और जैविक तरीकों से इसकी गुणवत्ता बनी रहती है, जिससे इसे प्रीमियम पहचान मिली है.
जयपुर का हवा महल अपनी 953 खिड़कियों और प्राकृतिक हवा प्रवाह के कारण बिना AC के भी ठंडा रहता है. वहीं राजस्थान का सबसे ठंडा स्थान माउंट आबू है, जो राज्य का इकलौता हिल स्टेशन है और यहां सबसे कम तापमान दर्ज किया जाता है.
राजस्थान में चित्तौड़गढ़ को सबसे ज्यादा नदियों वाला जिला माना जाता है. यहां करीब 17 छोटी-बड़ी नदियां बहती हैं, जिनमें चंबल, बनास, बेड़च और मेनाल प्रमुख हैं. ये नदियां जिले की खेती, पेयजल और पर्यटन के लिए बेहद अहम भूमिका निभाती हैं.
दौसा जिले का बांदीकुई राजस्थान की पहली रेल नगरी माना जाता है. यहां 20 अप्रैल 1874 को आगरा-बांदीकुई के बीच पहली ट्रेन चली थी. अंग्रेजों ने इसे सुनियोजित रेलवे केंद्र के रूप में विकसित किया. अब यह रेलमार्ग ब्रॉडगेज और विद्युतीकृत हो चुका है.
राजस्थान में बढ़ती गर्मी और 50 डिग्री तक पहुंचते तापमान के बीच रूफटॉप सोलर और टेरेस गार्डनिंग मॉडल बड़ा समाधान बन सकता है. इससे घर ठंडे रहेंगे, बिजली बिल घटेगा, अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई होगी और पानी की भी बचत होगी.
राजस्थान में लंगूर और लाल मुंह वाले बंदर कई बार एक ही इलाके में दिखते हैं. सीधे मुकाबले में लंगूर ज्यादा ताकतवर माना जाता है, लेकिन झुंड में रहने वाले रीसस मकाक कई बार भारी पड़ जाते हैं. विशेषज्ञ इंसानी दखल कम रखने की सलाह देते हैं.
राजस्थान की भीषण गर्मी में छत पर रखी पानी की टंकियां बेहद गर्म हो जाती हैं. सफेद पेंट, गीले बोरे, इंसुलेशन शीट, छाया और पाइप कवर जैसे आसान उपाय अपनाकर टंकी के पानी को काफी हद तक ठंडा रखा जा सकता है.
राजस्थान के बालोतरा और बाड़मेर क्षेत्र में रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े भंडार मिले हैं. सरकार ने कई ब्लॉकों को नीलामी सूची में शामिल किया है. इन खनिजों का उपयोग मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी में होता है.
थार रेगिस्तान की भीषण गर्मी और रेत के तूफानों के बीच BSF का ऊंट दस्ता भारत-पाक सीमा की सुरक्षा में दिन-रात तैनात है. खास ‘थारी’ नस्ल के ऊंट बिना पानी कई दिन तक गश्त कर सकते हैं और दुर्गम इलाकों में जवानों के सबसे भरोसेमंद साथी बने हुए हैं.