फलों की रेहड़ी लगाकर जीवनयापन कर रहीं अनाथ बहनें, तपोवन चाइल्डलाइन ने दिया सहारा

तपोवन चाइल्ड लाइन ने प्रयास करते हुए इन बहनों की कुछ मुश्किलें कम जरूर की हैं.

फलों की रेहड़ी लगाकर जीवनयापन कर रहीं अनाथ बहनें, तपोवन चाइल्डलाइन ने दिया सहारा
दोनों बहनों और रतनी के बेटे को हर संभव मदद चाइल्डलाइन की ओर से मुहैया करवाई जाएगी.

कुलदीप गोयल, श्रीगंगानगर: वार्ड नंबर-19, पुरानी आबादी, नजदीक पटवार घर में किराये के मकान में दो सगी बहनें रहती हैं. इनकी माता केलम का 10 साल और पिता हरचंद का 8 साल पूर्व निधन हो चुका है. दो बहनें कमल (17) वर्ष रतनी (22) वर्ष की हैं. 

कमल का स्कूल छूट चुका है और गणेश मंदिर के सामने, नजदीक धींगड़ा पार्क के पास फलों की रेहड़ी लगाती हैं और रतनी लोगों के घरों में काम करती थी, जो कि लॉकडाउन के चलते काम बंद है. रतनी का 5 वर्ष पूर्व सामूहिक विवाह समारोह में पंजाब के बरनाला में विवाह हुआ. रतनी बताती है कि उसके पति को नशे की लत थी और नशा न करने लिए मना करने पर उसने 4 वर्ष घर से निकाल दिया.  

रतनी के अब 4 साल का एक बच्चा है, जो इन दोनों बहनों के पास ही है और वह दोनों बच्चें की देखभाल करती हैं. अब पिछले 3 माह से दोनों बहनें फलों में तरबूज की रेहड़ी लगाकर वह अपना और अपनी बहन का पेट पाल रही है. रतनी लोगों के घरों में काम कर जो तीन हज़ार रुपये महीने के कमाकर लाती थी, उससे वह कमरे के महीने बारह सौ रूपये किराये के दे देती है और बाकि राशन आदि में चले जाते थे.

कमल और रतनी के पिता और उनकी माता के देहांत के बाद कोई भी इन दोनों बहनों को संबल देने वाला नहीं बचा, जो कोई एक आधा रिश्तेदार थे, उन्होंने भी इनसे मुंह मोड़ लिया.

आज चाइल्डलाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर अमित कुमार ने इन दोनों बहनों के लिए मदद मांगी तो तपोवन चाइल्डलाइन के परियोजना निदेशक महेश पेड़ीवाल, जिला समन्वयक त्रिलोक वर्मा इनसे मिलने के लिये पुरानी आबादी, गणेश मंदिर पहुंचे और इनकी सुध ली. पता करने घर जाकर देखा तो बहुत ही दयनीय हालत में यह दोनों बहनें अपना जीवन यापन बड़ी मुश्किल से कर पाती हैं. आज इन दोनों बहनों को महेश पेड़ीवाल कि तरफ से तीन महीने का राशन एवं आर्थिक मदद दी है, दोनों बहनों और रतनी के बेटे को हर संभव मदद चाइल्डलाइन की ओर से मुहैया करवाई जाएगी.

जब इनसे और बात की तो पता चला कि महीने के पांच सौ रुपये रेहड़ी किराया देना पड़ता है. तपोवन चाइल्ड लाइन ने प्रयास करते हुए इन बहनों की कुछ मुश्किलें कम जरूर की हैं.