देश के इतिहास में पहली बार खेल व्यवस्था ठप, 54 खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता रद्द

राहुल मेहरा की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 2010 में एक पीआईएल लगाई गई थी. 

देश के इतिहास में पहली बार खेल व्यवस्था ठप, 54 खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता रद्द
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: खेलों के इतिहास में ये पहला मौका है, जब भारत की पूरी खेल व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है और ऐसा हुआ है दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा एक पीआईएल पर दिए गए फैसले के चलते. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 54 राष्ट्रीय खेल महासंघों की मान्यता पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है.

साथ ही खेल मंत्रालय के फैसले पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बरकरार रखने के भी निर्देश दिए हैं. अदालत के फैसले के बाद अब ये साफ हो गया है कि देश में न तो किसी प्रकार की कोई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित होगी और न ही खिलाड़ियों, कोचेज और अन्य स्टाफ को मिलने वाली सुविधा मिलेगी. साथ ही भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली तमाम सुविधाएं भी रोक दी गई हैं.

देश में इस समय 54 खेल महासंघ खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त हैं तो वहीं तीन खेल मान्यता की दौड़ में लगे हुए थे. हर साल 31 दिसम्बर को सभी खेल महासंघ की मान्यता पूरी हो जाने के कारण नवीन मान्यता के लिए आवेदन करना जरुरी है लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते खेल संघ मान्यता से वंचित रह गए थे. इसके बाद खेल मंत्रालय ने मान्यता प्राप्त सभी खेल महासंघों को राहत देते हुए 2 जून 2020 को इन 54 खेल महासंघों की मान्यता अस्थाई रूप से 30 सितम्बर तक बढ़ा दी थी लेकिन तीन खेल महासंघ स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई), गोल्फ यूनियन और रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया खेल मंत्रालय की मान्यता से वंचित रह गए थे, जिसके बाद खेल मंत्रालय की ओर से हाईकोर्ट में तीनों खेल महासंघों की मान्यता देने के लिए प्रार्थना पत्र लगाया.

54 खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता रद्द
गौरतलब है कि राहुल मेहरा की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 2010 में एक पीआईएल लगाई गई थी. पीआईएल के तहत खेल मंत्रालय और देश की खेल गतिविधियों में मनमर्जी के आरोप लगाए गए थे, जिस पीआईएल पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 फरवरी 2020 को खेल मंत्रालय और इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. नरेन्द्र बत्रा को आदेश दिए थे कि किसी भी आदेश और गतिविधियों के लिए पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी लेकिन जब खेल मंत्रालय इन तीन खेल महासंघों की मान्यता के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के 54 खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता के आदेश पर ऐतराज जताया. साथ ही दो दिनों में इन सभी खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता को रद्द करने के आदेश दिए, जिसके बाद केन्द्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने 54 खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता को तुरंत निरस्त करने के आदेश जारी किए.

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और खेल मंत्रालय द्वारा दिए गए फैसले के बाद वर्तमान में देश में किसी भी खेल महासंघ को मान्यता नहीं है. ऐसे में देश की खेल व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है. वॉलीबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव रामवतार सिंह जाखड़ का इस पूरे मामले पर कहना है कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि देश की खेल व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है. न तो इस समय देश में किसी खेल महासंघ को मान्यता प्राप्त है और न ही अब देश में किसी भी प्रकार के कोई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित हो सकती है. इसके साथ ही खेलों से जुड़े हुए खिलाड़ियों को कोई सुविधा मिल सकेगी. ऐसे में अब मंत्रालय को जल्द से जल्द खेल महासंघों की मान्यता की प्रक्रिया को पूरा करने का काम किया जाना चाहिए.

कोर्ट के फैसले के बाद अगर सबसे ज्यादा कोई प्रभावित होगा तो वो है देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी. खेल महासंघों की मान्यता समाप्त  होने के बाद न तो खिलाड़ियों के खेल मंत्रालय की ओर से किसी प्रकार का भुगतान किया जाएगा और न ही कोई सुविधा मिल पाएगी. इसके साथ ही किसी भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता का भी आयोजन नहीं हो पाएगा. राजस्थान के पूर्व नेशनल वॉलीबाल खिलाड़ी अरुण चौटिया का कहना है कि खेल महासंघों की अस्थाई मान्यता समाप्त होने से खिलाड़ियों को ही नुकसान होगा. ऐसे में खिलाड़ियों को नुकसान से बचाने के लिए जल्द से जल्द खेल मंत्रालय की ओर से कदम उठाने चाहिए.