पूरा हुआ नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल- अब कोटा,जोधपुर और जयपुर नगर निगम की कमान राज्य सरकार के पास

मीठे-कडवे अनुभवों के साथ जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगम का बोर्ड (Municipal Corporation Board )का कार्यकाल आज पूरा हो गया है. इसी के साथ अब नगर निगम की कमान प्रशासक(Administrator) के हाथ में आ गई है.अगले कुछ माह तक जयपुर, जोधपुर और कोटा को निर्वाचित शहरी सरकार (Elected urban government) नहीं मिलेगी.  

पूरा हुआ नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल- अब कोटा,जोधपुर और जयपुर नगर निगम की कमान राज्य सरकार के पास
कोटा,जोधपुर और जयपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म

दीपक गोयल,जयपुर: मीठे-कडवे अनुभवों के साथ जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगम का बोर्ड (Municipal Corporation Board )का कार्यकाल आज पूरा हो गया है. इसी के साथ अब नगर निगम की कमान प्रशासक(Administrator) के हाथ में आ गई है.अगले कुछ माह तक जयपुर, जोधपुर और कोटा को निर्वाचित शहरी सरकार (Elected urban government) नहीं मिलेगी आपको बता दे कि तीनों ही शहरों में दो-दो नगर निगम कर दिए गए हैं.ऐसे में अब कुल नगर निगम की संख्या छह हो गई है.सरकार ने इसी आधार पर नगर निगम के वर्तमान आयुक्त को दो-दो नगर निगम पर प्रशासक नियुक्त किया है.
एक शहर में एक ही अफसर को दोनों नवगठित निगम की जिम्मेदारी दी गई है.लेकिन आदेश दोनों नगर निगम के अलग-अलग निकालने होंगे. राज्य सरकार के आदेश के अनुसार जयपुर हैरिटेज नगर निगम और जयपुर ग्रेटर निगम में IAS विजयपाल सिंह को प्रशासक नियुक्त किया गया है. जोधपुर उत्तर और जोधपुर दक्षिण नगर निगमों में IASसुरेश ओला को दोनों निगमों के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया है. इसी तरह कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम में IAS वासुदेव मालावत को प्रशासक नियुक्त किया गया है. फिलहाल इन तीनों शहरों में से दो शहर जोधपुर और कोटा में भाजपा का ही बोर्ड और महापौर है. जबकि, जयपुर में बोर्ड तो भाजपा का है लेकिन भाजपा से बागी हुए पार्षद विष्णु लाटा कांग्रेस समर्थन से महापौर बने.
शहरी सरकारों का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही इन निगमों में आमजन से जुड़े कार्यो के लिए बनी संचालन समितियां भी भंग हो गई है. समितियों के भंग होने के बाद आमजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अटक जाएंगे. इसमें डेयरी बूथों, पान बूथ के आवंटन, भवन मानचित्रों के अनुमोदन के अलावा अनुकम्पा नियुक्ति सहित कई अहम निर्णयों के प्रस्ताव लटक सकते है .इस पूरे प्रकरण में एक मामला भी सामने आ रहा है. नगर निगम की ओर से महापौर और उपमहापौर को जारी पहचान पत्र में वेलेडिटी 29 नवम्बर अंकित है. इस आधार पर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं. दरअसल इन तीनों ही शहरों की 6 निकायों में चुनाव जल्द होने की भी कवायद शुरू हो गई है. जिस तरह से राज्य सरकार ने इन निकायों में वार्डों के सीमांकन करने की समयावधि को दो बार कम करके 5 जनवरी कर दिया है. ऐसे में संभावना है कि अगले वर्ष फरवरी या मार्च में इन निकायों में चुनाव करवाए जा सकते है.सरकार भी अब यही चाहती है कि इन निकायों में चुनाव जल्द हो. हाल ही में 49 निकायों में हुए चुनावों के परिणामों को देखकर सरकार उत्साहित है और इस माहौल का इन निगम के चुनावों में भी उसे लाभ मिलने की उम्मीद है .
जयपुर नगर निगम में पहली बार है जब एक ही बोर्ड कार्यकाल में शहरी सरकार की सत्ता तीन महापौर के हाथ में रही. पहले दो साल निर्मल नाहटा महापौर चुने गए. हिंगौनिया गौशाला में गायों की मौत के प्रकरण के बाद उन्हें हटाकर अशोक लाहोटी को कमान सौंपी गई.वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद लाहोटी ने महापौर पद से इस्तीफा दे दिया.इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से भाजपा के बागी पार्षद विष्णु लाटा जयपुर के महापौर बन गए