जयपुर: सरिस्का के जंगल में अतिक्रमण रोकने के लिए आए खूंखार भालू

वन विभाग का मानना हैं की सरिस्का के जंगलो में इंसानी गतिविधियो और अतिक्रमण को रोकने में भालू मददगार साबित होगा

जयपुर: सरिस्का के जंगल में अतिक्रमण रोकने के लिए आए खूंखार भालू
अतिक्रमण को रोकने में भालू मददगार

रौशन शर्मा, जयपुर : सरिस्का-पाण्डूपोल (Sariska-Pandupol)के जंगल भालूओं के लिहाज से बेस्ट डेस्टिनेशन (Best destination)माना जाता हैं. भालू के लिहाज से सरिस्का की भौगोलिक स्थिति की बात करे तो वो भी मिलान करती हैं. पाण्डूपोल सरिस्का के जंगलों में शहद से लेकर गूल्लर के पेड़ों की भरमार है. वन विभाग का मानना हैं की सरिस्का के जंगलो में इंसानी गतिविधियो और अतिक्रमण को रोकने में भालू मददगार साबित होगा.वही सरिस्का में भालू लेकर आने का सीधा मकसद यहां पर्यटन को  बढ़ाना है. वन विभाग माउंट आबू से चार भालू लाना चाहता हैं इसके लिए केन्द्रीय वाइल्डलाइफ बोर्ड में मंजूरी की गुहार लगाई है. हालांकि सरिस्का में शिकार की घटनाओं के बाद केन्द्रीय वाइल्डलाइफ बोर्ड नें अभी तक शिफ्टिंग की परमिशन नहीं दी हैं. लेकिन वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने जल्द इस सम्बंध में बात कर अनुमति दिलवाने की बात कर रहे हैं. 

दरअसल राजस्थान के माऊंटआबू के जंगलों में भालू अच्छी सख्या में देखने को मिलता है. लेकिन माऊंटआबू में भालूओं को अनुकूल माहौल नहीं मिल रहा हैं. पिछले कुछ सालों में माऊंटआबू के भालूओं को कचरा खाते हुए देखा गया हैं. साथ ही आबादी की ओर भी इनका ज्यादा मूवमेंट बना रहता हैं. ऐसे में अब माऊंटआबू से 4 भालूओं को शिफ्ट करने के प्लान पर काम किया जा रहा हैं. माऊंटआबू से सरिस्का में भालूओं को शिफ्ट करने के पीछे इको ट्यूरिजम को बढ़ावा देने से लेकर यहां के अनुकूल माहौल को खास वजह माना जा रहा है . सरिस्का में भालूओं के खाने के लिए प्रचूर मात्रा में शहद, गुलर, और जंगली फल मौजूद हैं. सरिस्का दिल्ली एनसीआर रिजन से लगता हूआ इलाका हैं. दिल्ली से महज 2 घंटे की दूरी पर सरिस्का नेशनल पार्क हैं साथ ही दिल्ली आगरा जयपुर ट्रायएंगल से भी मिलता हूआ इलाका हैं.ऐसे में प्रदेश को इको -ट्यूरिजम में अव्वल बनाने के लिए वन मंत्री रणथम्भौर के बाद सरिस्का में इको ट्यूरिजम को बढावा देने की हर सम्भव कोशिश कर रहे हैं . लेकिन इस मामले में वन विभाग की गम्भीरता पर सवाल तब उठते है जब सरिस्का और रणथम्भौर में टाइगर की मौत के मामले सामने आते हैं . इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं. 2 साल पहले तक इन जंगलों में घूमने वाले भालू और बाघिन एसटी-5 का वन विभाग के पास कोई जवाब नही हैं. लेकिन ऐसी घटनाओ पर मंत्री गम्भीरता दिखा रहे है  वन विभाग कितना खरा उतरता है ये देखने वाली बात होगी.