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राजस्थान: किरोड़ी सिंह बैंसला ने थामा बीजेपी का हाथ, सियासी आंधी में बुझी गुर्जर आरक्षण की आग

राजस्थान में 10 साल बाद एक बार फिर आरक्षण की आग सियासी आंधी में बुझ गई है. बार बार आरक्षण की चिंगारी लगाने वाले कर्नल बैंसला, जो कभी पटरियों से उतरने के लिए तैयार नहीं होते थे.

राजस्थान: किरोड़ी सिंह बैंसला ने थामा बीजेपी का हाथ, सियासी आंधी में बुझी गुर्जर आरक्षण की आग

जयपुर: राजस्थान में गुर्जर आरक्षण की आग लगाने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला अब बीजेपी के हो गए है. हर बार समाज की आड़ में आंदोलन करने वाले बैंसला ने इस बार सियासी खेल खेलने से पहले समाज से नहीं पूछा कि वह बीजेपी में शामिल हो या नहीं. जब भी बैंसला आंदोलन करते थे तो वह हमेशा समाज की आड़ में ही पूरे राजस्थान को जाम कर देते थे लेकिन इस बार कर्नल साहब ने सियासी पारी फिर से शुरू करने के लिए समाज का नहीं, बल्कि बीजेपी का सहारा लिया. सबसे बड़ी बात ये है कि इस बार कर्नल साहब अकेले नहीं गए, बल्कि अपने बेटे के लिए भी राजनीति का रास्ता खुलवा दिया.

राजस्थान में 10 साल बाद एक बार फिर आरक्षण की आग सियासी आंधी में बुझ गई है. बार बार आरक्षण की चिंगारी लगाने वाले कर्नल बैंसला, जो कभी पटरियों से उतरने के लिए तैयार नहीं होते थे. आज उसी बैंसला को कमल का फूल इतना रास आ गया कि वह इसे पाने के लिए दिल्ली तक चले गए. सियासी सफर को एक बार फिर से शुरू करने के लिए बैंसला ने पटरी अकेले नहीं पकड़ी, उनके बेटे विजय बैसला ने भी जमकर सियासी जमीन बनाई. कर्नल का सियासी आंदोलन तो उस वक्त ही शुरू हो गया था जब बैंसला ने फिर से आंदोलन का बिगुल बजाया लेकिन इस बार कर्नल बैंसला खुद के लिए नहीं बल्कि बेटे विजय बैसला के लिए सियासी जमीन टटोल रहे थे.

आपको बता दें, यह वही किरोड़ी बैंसला है, जिन पर इसी बीजेपी सरकार ने देशद्रोह और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. कर्नल बैंसला का बीजेपी से दामन थामने के बाद अब गुर्जर नेता ही अपने मुखिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं. गुर्जर नेता हिम्मत सिंह का कहना है कि जिस बीजेपी पार्टी ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया, अब उसी पार्टी ने देशद्रोही को देशभक्ति का सर्टिफिकेट दे दिया. बीजेपी सरकार में हुए गुर्जर आंदोलन में 73 लोगों की मौत हो गई, लेकिन इसके बावजूद भी कर्नल साहब ने बीजेपी का दामन थाम लिया.

ये पहली बार नहीं है जब कर्नल किरोड़ी बैंसला सियासी मैदान में उतरकर अपनी ताकत घोक रहे हैं, बल्कि इससे पहले भी वह चुनाव लड़ चुके हैं. किरोडी सिंह बैंसला 2009 में सवाईमाधोपुर सीट से बीजेपी के लिए लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि इसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी, इससे पहले भी वह जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ चुके हैं. इस बार कर्नल बैंसला की तो दूसरी पारी होगी, लेकिन उनके बेटे यानि विजय बैंसला की ये पहली सियासी पारी है.