1687 में मद्रास में हुआ था पहला नगर निगम का चुनाव, जानिए निकाय का पूरा इतिहास

अंग्रेजी हुकूमत ने निकायों की स्थापना विदेशों में जिस काम से की थी. उसी तर्ज पर इसे भारत में भी लागू किया गया था. पहले भी सफाई, जल निकासी, शहर में रोशनी और विकास नगर निकायों के जिम्मे होता था. यही व्यवस्था ग्रेट ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में आज भी चल रही है. 

1687 में मद्रास में हुआ था पहला नगर निगम का चुनाव, जानिए निकाय का पूरा इतिहास
जयपुर में नगर निगम की स्थापना 1869 में की गई

झुंझुनूं: प्रदेश में निकाय चुनाव का प्रचार आज थम गया आने वाले एक सप्ताह के अंदर वोटिंग भी होगी और नतीजे भी आएंगे .लेकिन क्या आप जानते है कि ये निकाय शब्द आया कहां से. कैसे ये अस्तित्व में आया और कैसे इसकी स्थापना हुई. शायद आज की युवा पीढ़ी इन सबसे इत्फाक ना रखती हो. स्थानीय निकाय, लोकल बॉडीज, म्यूनिसिपल बोर्ड इन नामों से आप जिसे पहचानते है. उनका काम है शहरों का विकास करना.दरअसल लोकल बॉडीज की परिकल्पना विदेशी है. गुलामी के वक्त 1687 में अंग्रेजों ने सबसे पहले मद्रास में नगर निगम की स्थापना की थी. लेकिन बात राजस्थान की करें तो यहां पर सबसे पहले इसकी स्थापना 1864 में हुई थी. राजस्थान के पर्यटन स्थल माउंट आबू में सबसे पहले नगरपालिका की स्थापना की गई. राजधानी जयपुर की बात करें तो करीब 5 साल बाद प्रदेश की चौथी निकाय के रूप में जयपुर नगर परिषद के रूप में स्थापना की गई. सबसे पहले माउंट आबू में मंडल  होने के बाद 1866 में अजमेर और 1867 में ब्यावर में नामित मंडलों की स्थापना की गई थी. वहीं जयपुर में स्थापना 1869 में की गई. झुंझुनूं में पहला नामित मंडल आजादी से पहले 1931 में स्थापित हुआ और उसका संचालन दादाबाड़ी से हुआ.
अंग्रेजी हुकूमत ने निकायों की स्थापना विदेशों में जिस काम से की थी. उसी तर्ज पर इसे भारत में भी लागू किया गया था. पहले भी सफाई, जल निकासी, शहर में रोशनी और विकास नगर निकायों के जिम्मे होता था. यही व्यवस्था ग्रेट ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में आज भी चल रही है. लेकिन विदेशों में यह व्यवस्था भारत से कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से चल रही है.
1970 से पहले निकायों को लेकर कोई स्पष्ट संविधान भी नहीं था और इन पर सरकार का कंट्रोल ज्यादा था. लेकिन 74वें संविधान संशोधन के बाद ना केवल एक व्यवस्था तय हुई बल्कि निकायों को लेकर एक तस्वीर साफ हुई लेकिन इस संविधान संशोधन के कारण करीब 20-22 साल तक निकाय प्रशासकों के सहारे थी. संविधान संशोधन के बाद 1994 में चुनाव हुए. हालांकि चुनाव की प्रक्रिया 1959 में शुरू हो गई थी लेकिन निकायों के कार्यकाल को लेकर कोई समय सीमा तय नहीं थीं
आजादी से पहले प्रदेश में करीब 109 निकायों की स्थापना की जा चुकी थी और इनके नाम थे नामित मंडल. जिनका अध्यक्ष मनोनीत किया जाता था. और उनके साथ 7 सदस्यों का सलाहकार मंडल भी होता था. जिसमें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, थाने का दरोगा, चिकित्सक, स्कूल का संस्था प्रधान और अन्य मौजिज लोग. इनका पर्यवेक्षण तत्कालीन सरकार करती थी. झुंझुनूं निकाय पर शोध करने वाले डॉ. कमल अग्रवाल की मानें तो जब उन्होंने इस विषय पर पांच सालों तक शोध किया तो कई बातें सामने आई। जिनमें साफ हुआ कि नामित मंडल का नाम ही बदलकर बाद में नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम किया गया. चूंकि पहले मनोनयन पर ये मंडल चलते थे. इसलिए उसका नाम नामित मंडल था. इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद इनके नाम भी बदल दिए गए.नामित मंडलों में 1952 के बाद चुनावों की प्रक्रिया शुरू हुई. जिसका उल्लेख इतिहास में भी है. लेकिन इस दौरान भी सभी निकायों की बजाय कुछ निकायों में चुनाव और कुछ में गफलत वाली स्थिति थी. झुंझुनूं में पहला चुनाव 1959 में हुआ और यहां से बनवारी लाल वैद्य अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद 1970 तक चुनाव हुए. वहीं 20-22 साल बाद चुनाव 1994 में फिर से शुरू हुए.