close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सादुलशहर के इस गांव में घर तक पहुंचने के लिए जनता बना रही नहर से रास्ता

कई दफा नहर पार करते समय स्टूडेंट्स एवं ग्रामीण पानी में गिर चुके हैं, चोटिल भी हो चुके हैं. लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

सादुलशहर के इस गांव में घर तक पहुंचने के लिए जनता बना रही नहर से रास्ता
इस ग्राम पंचायत को तीन साल पहले ओडीएफ घोषित कर दिया गया था.

सादुलशहर: यू तो हम चांद पर पहुंच रहे हैं लेकिन सादुलशहर में एक गांव ऐसा भी है जहां ग्रामीणों को अपने घर तक पहुंचने के लिए नहर में से रास्ता बनाना पड़ रहा है. जिसको लेकर जनता को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है. वैसे तो इस गांव को आओडीएफ घोषित कर दिया गया है लेकिन हर गली में गंदगी ही गंदगी दिखाई देती है. यही नहीं पीने के पानी के हालत तो और भी भयानक हैं.

हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत नूरपुरा की, यहां से गुजरने वाली 330 क्यूसेक पानी की क्षमता वाली केएसडी वितरिका का पुल बुर्जी संख्या 15-16 के मध्य करीब ढाई माह से टूटा पड़ा है. इस पुल पर से आवाजाही बंद है. हालत ऐसे हैं की नजदीकी पुल तक जाने के लिए ग्रामीणों को छह किलोमीटर का लंबा सफर कर आना-जाना पड़ रहा है. खास बात यह भी है कि यह पुल पंजाब के साथ लगते गांव कुलार एवं दोदेवाला को भी जोड़ता है. 

पुल टूटा होने एवं पुन: नया नहीं बनाने के कारण एक दर्जन गांवों और ढाणियों के ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. खास कर स्टूडेंट्स ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं. ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पुल के पास ही एक लोहे की पोड़ी नहर मे डाल रखी है. उसके सहारे नहर में उतरकर आना-जाना कर रहे हैं. कई दफा नहर पार करते समय स्टूडेंट्स एवं ग्रामीण पानी में गिर चुके हैं, चोटिल भी हो चुके हैं. लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

वहीं इस ग्राम पंचायत को तीन साल पहले ओडीएफ घोषित कर दिया गया था. लेकिन गांव के बाहर ओडीएफ के पत्थर के अलावा इस गांव में सूंदर कुछ भी नहीं है. जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं. दो हफ़्तों पहले हुई बरसात का पानी अभी तक गलियों में खड़ा है और बदबू मारने लगा है. हालत ऐसे हैं की लोगों को दीवार पकड़ कर रास्ता पार करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि मस्जिद के आगे 60 गुणा 120 का भूखंड पार्क के लिए आरक्षित है. ग्राम पंचायत द्वारा पार्क विकसित करना तो दूर सफाई तक नहीं करवा जा रही. इस भूखंड पर कूड़ा-कचरा, गोबर, यहां तक कि कई  बार आवारा कुत्ते मरे हुए पशुओं के अवशेष भी उठाकर यहां डाल जाते हैं. 

इसी ग्राम पंचायत के करीब 2200 की आबादी वाले गांव धींगतानिया के वाटरवर्कर्स का चैनल एवं चैंबर क्षतिग्रस्त होने के कारण पिछले करीब 20 दिनों से नहरी पानी की सप्लाई बंद पड़ी है. पानी स्टोरेज की एक डिग्गी खाली हो चुकी है. डिग्गी के तल में भारी मात्रा में दलदल एवं मिट्टी भरी होने के कारण घास-फूस तक उग आया है. दूसरी डिग्गी में नाम मात्र का दूषित एवं हरे रंग युक्त पानी पड़ा हुआ है. दोनों फिल्टर्स प्लांट्स सूखे पड़े हैं. परिसर में लगे ट्यूबवेल से नाम मात्र का पानी सप्लाई किया जा रहा है. वह पानी भी खारापन लिए हुए है. यह पानी पीने से दस्त आदि के रोगी बढ़ रहे हैं. 

ग्रामीणों ने कहा है की गाँव में इतनी समस्याएं हैं लेकिन ग्राम पंचायत इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रही है. जब इस बारे में सरपंच रमणीक सिंह से बात की गयी तो उन्होंने कहा की एक साल से काम लटका हुआ है लेकिन ठेकेदार ध्यान नहीं दे रहा है. उन्होंने स्थानीय अधिकारियों का बचाव करते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया. अब ग्रामीणों ने विधायक से मिलने का निर्णय लिया है ताकि गांव की समस्याएं दूर हो सकें.