जिसने देश को बनाया महाशक्ति वही हुआ अपंग, जानिए पोकरण के इस गांव की पूरी दास्तां

जी न्यूज टीम ने पोकरण के खेतोलाई के निवासियों व वहां हुए विकास कार्यो की नब्ज टटोली तो विकास की एक अलग हकीकत सामने आई.

जिसने देश को बनाया महाशक्ति वही हुआ अपंग, जानिए पोकरण के इस गांव की पूरी दास्तां
विकास के मुद्द पर किसी भी सरकार की नजर इस गांव पर नहीं पड़ी

पोकरण: राजनीतिक दलों की ओर से जुमलों के जरिए जनता को फिर विकास के सपने दिखाए जा रहे हैं और विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिस पोकरण के कारण भारत पूरी दुनिया में महाशक्ति बनकर उभरा है. इस पोकरण विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान जमीनी हालात क्या हैं इसके लिए जी न्यूज टीम ने पोकरण के खेतोलाई के निवासियों व वहां हुए विकास कार्यो की नब्ज टटोली तो विकास की एक अलग हकीकत सामने आई.

पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाने व भारत को परमाणु बम की क्षमता रखने वाली महाशक्तियों में शामिल करवाने वाले गांव खेतोलाई दशकों बाद भी अकाल जैसे हालात से जूझ रहा है. भारत सरकार की ओर से वर्ष 1974 में एक व वर्ष 1998 में दो दिन में पांच परमाणु परीक्षण के बाद जैसलमेर जिले का पोकरण क्षेत्र देश-दुनिया में सुर्खियों में आया था. जिसके बाद दुश्मन देश तक पोकरण पर सीधी नजर रखने लगे. लेकिन विकास के मुद्द पर किसी भी सरकार की नजर इस गांव पर नहीं पड़ी.

परमाणु परीक्षण होने के बाद रातों-रात खेतोलाई गांव भी दुनिया भर चमका तो यहां के लोगों की बड़ी उम्मीदें भी जगी कि अब तो उनके गांव पर सत्ता व सरकार की सीधी नजर रहेगी. गांव के विकास की कोई कमी नहीं रहेगी. लेकिन खेतोलाई में बीस साल में ज्यादा कुछ नहीं बदला. लोग मुलभूत सुविधाओं को आज भी तरस रहे हैं. न सड़क है और न पेयजल का कोई इंतजाम हैं. पशुधन के लिए चारा-पानी का इंतजाम भी मुश्किल हो रहा है. 

ग्रामीणो ने बताया कि परीक्षण के कारण खेतोलाई गांव के नाम से हर किसी को गर्व होता है. देश-दुनिया तक पहचान हैं, लेकिन गांव बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है. परमाणु परीक्षण ने गांव को कैंसर, खुजली जैसी बीमारियों के दंश दिए हैं. कई लोगों की गुपचुप मौतें हो रही है. इंसान ही नहीं मवेशी भी रेडिएशन के प्रभाव के कारण अपंग, अंधेपन के शिकार हो रहे हैं. बीमार गायों का दूध सेवन करने से बीमारी इंसानों तक पहुंच रही है. गांव में चिकित्सा-सुविधा नहीं है. 

चुनाव में नेता विकास व चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने व पेयजल आपूर्ति के आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई पलटकर नहीं देखता. सरकारे आती जाती रहती है लेकिन इस गाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता. जिससे अब मतदान से उनका मोह भंग हो गया है लेकिन उनकी मजबूरी है कि मत का अधिकार है उनको तो करना ही पड़ेगा. लेकिन नेताओ के वादों पर अब उन्हें कोई भरोसा नहीं है.