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पाली में भीषण पेयजल संकट, रोहट उपखंड के हालात हैं सबसे ज्यादा खराब

पाली जिले का एक भी उपखण्ड नहीं जो पेयजल संकट से नहीं झुंझ रहा हो लेकिन जिले में सबसे अधिक कोई उपखण्ड पानी के लिए झुंझ रहा है तो वो है रोहट उपखण्ड है.

पाली में भीषण पेयजल संकट, रोहट उपखंड के हालात हैं सबसे ज्यादा खराब
प्रतीकात्मक तस्वीर

पाली: यूं तो पाली जिला हर बार बारिश की बेरुखी के चलते अकाल से दो दो हाथ करता आया लेकिन इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग ही है. जवाई बांध ने अपना तल दिखा दिया तो सरकारी कुओं ने भी जबाब दे दिया. शहर में 96 घंटे में पानी दिया जा रहा है तो गांवो की हालत बहुत दयनीय हो गई है. 7 दिन से लेकर महीनों तक पानी नहीं आता. महिलाएं चार चार किलोमीटर दूर से एक मटकी पानी लाने को मज़बूर हो गए. 

पानी माफिया 1,000 से 2,000 टेंकर पानी के ले रहे हैं जो हर किसी के बस कि बात नहीं होती. सबसे ज्यादा हालात तो जानवरों की खराब हो रही है. मवेशी बिना पानी के दम तोड़ रहे हैं लेकिन प्रशासन इन सबके आगे अपाहिज नजर आ रहा है. समाजसेवी जरूर अपने स्तर पर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे हैं लेकिन वो भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है.

पाली जिले का एक भी उपखण्ड नहीं जो पेयजल संकट से नहीं जूझ रहा हो लेकिन जिले में सबसे अधिक कोई उपखण्ड पानी के लिए झुंझ रहा है तो वो है रोहट उपखण्ड है. रोहट उपखण्ड क्षेत्र पिछले लम्बे समय से पेयजल के संकट से झुंझ रहा है. पिछली बार मानसून की बेरुखी से जवाई में पानी नहीं आया तो इस बार हालात और भी ज्यादा खराब हो गए. गांवो में सात दिन से एक महीने तक पानी के दर्शन तक नहीं होते. महिलाएं अलसुबह जल्दी उठाकर एक मटकी पानी के लिए तीन से चार किलोमीटर दूर निकलती हैं और जहां भी कुआ तालाब मिलता है वहां से पानी लाती हैं.

पानी लाने के बाद घर का काम बच्चों के लिए रोटी बनाना फिर मजदूरी में लिए निकलना मानो हर दिन की दिनचर्या में शामिल हो गया है. इस बीच पानी माफियाओं की चांदी हो गई. मनमाने रूपयो पर एक टेंकर पानी को बेचा जा रहा है. गांवों के तालाब सूखे पड़े हैं तो कई तालाबो में पानी है लेकिन इतना खारा कि एक बूंद पानी नहीं पी सकते. रही गयी कसर पाली के प्रदूषण ने पूरी कर दी. फेक्ट्रियों का पानी तालाब तक जा पहुंचा और कुओं का पानी भी जहरीला हो गया.

रोहट उपखण्ड पिछले चालीस साल से अधिक समय से पेयजल के संकतसे झुंझ रहा है. प्रशाशन सरकारी टेंकर से गांवो में भेजने की बात कर रहा है. हाल ही में सोनाइलाखा गांव में बने कुए में टैंकर ने पानी खाली किया तो ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. क्या बच्चे, क्या बूढ़े, जवान हर कोई एक मटकी पानी के लिए जोर आजमाइश करता नजर आया. कई लोगो ने तो टैंकर को ही घेर लिया. नौबत हाथापाई और झगड़े तक आ जाती है.