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जहर दिए जाने के बाद भी नहीं हारी जयपुर की यह बेटी, बालविवाह के खिलाफ लड़ रही जंग

जान लेने और और दुष्कर्म करने की धमकियां मिलने के बावजूद वह बालविवाह के खिलाफ जंग में जुटी हुई है. 

जहर दिए जाने के बाद भी नहीं हारी जयपुर की यह बेटी, बालविवाह के खिलाफ लड़ रही जंग
सामाजिक उत्पीड़न की इंतहा तो तब हो गी जब एक रिश्तेदार ने कृति को धीमा जहर दे दिया.

जयपुर: पहले दुनिया में आने की जिद्द, फिर जिंदगी की जद्दोजहद और अब समाजिक कुरीति को मिटाने के संग्राम में अपराजेय योद्धा की भांति खड़ी राजस्थान की कृति भारती ने हजारों लड़कियों को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया है. 

कृति को मां के कोख में ही उसके परिवार के लोग मार डालना चाहते थे, लेनिक उसकी मां उसे जन्म देना चाहती थी. आखिरकार अपरिपक्व शिशु के रूप में गर्भधारण के सात महीने में ही उसका जन्म हुआ. उसकी मां के लिए इसके बाद शुरू हुई उसकी जिंदगी जीने की जद्दोजहद, क्योंकि परिवार के लोग उसे बला समझते थे. पिता पहले ही उसकी मां को छोड़ चुके थे. लेकिन कृति ने जिंदगी के सारे झंझावातों को झेला. 

जान लेने और और दुष्कर्म करने की धमकियां मिलने के बावजूद वह बालविवाह के खिलाफ जंग में जुटी हुई है. कृति ने बताया कि उसकी जिंदगी की जंग मां के गर्भ से ही शुरू हुई, क्योंकि मां उसे जन्म देना चाहती थी और रिश्तेदार उन्हें उत्पीड़ित कर रहे थे. चिकित्सा संबंधी समस्याओं को लेकर उसके सिर में गंभीर जख्म पड़ गया था. 

कृति ने मीडिया को बताया कि, 'इस दुनिया में आने की जिद्द के साथ मेरा संघर्ष शुरू हुआ. अपने रिश्तेदारों की मर्जी के विरुद्ध मैं इस दुनिया में आई. मुझे बचपन से ही प्रताड़ना और उलाहना झेलनी पड़ी. जब मेरी मां काम करने जाती थी तो मेरे रिश्तेदार मेरे साथ बुरा बर्ताव करते थे.'

उसने बताया, 'कुछ रिश्तेदार मुझे देखकर अपना रास्ता बदल लेते थे. वे मुझे अभागिन समझते थे'.कृति ने बताया कि बचपन में ऐसे बर्ताव से उनकी मनोभावना को ठेस पहुंचती थी, लेकिन उनकी मां इंदु और दादा-दादी नेमिचंद और कृष्णा महनोत उसे सहारा देते थे. 

सामाजिक उत्पीड़न की इंतहा तो तब हो गी जब एक रिश्तेदार ने कृति को धीमा जहर दे दिया. उस समय वह दस साल की थी. वह बच तो गई लेकिन उसे लकवा मार गया. कृति ने कहा, 'मैं न तो बैठ पाती थी और न ही चल-फिर पाती थी. सोते समय करवट भी नहीं बदल पाती थी. शरीर का करीब 90 फीसदी हिस्सा चेतनाशून्य हो गया. कई अस्पतालों में इलाज करवाने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिला'.

उसकी मां उसे भिलवाड़ा स्थित रेकी टीचर ब्रह्मानंद सरस्वती के आश्रम लेकर गई, जहां रेकी ईलाज सत्र के दौरान कुछ सुधार हुआ. जिंदगी में दूसरी बार 11 साल की उम्र में उसने चलना सीखा. वह छोटे बच्चे की तरह घिसटकर चलती थी. 12 साल की उम्र में वह फिर से अपने पैरों पर चलने-फिरने लगी. 

उसने बाद में पढ़ना-लिखना शुरू किया और चार साल के बाद वह बोर्ड परीक्षा में शामिल हुई. कृति ने बताया, 'रोजाना 15-16 घंटे अध्ययन करके मैंने 10वीं की परीक्षा दी। उसके बाद 12वीं की और फिर स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री ली. इसके बाद मैंने जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की'.

डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने के बाद वह अपने मिशन में जुट गई और सामाजिक लांछन झेल रही बच्चियों और महिलाओं की भलाई का काम करने लगी. उसका सपना है कि राजस्थान बालविवाह मुक्त राज्य बने. अनेक लड़कियों को बालविवाह के अभिशाप से मुक्त करवाने के बाद वह ऐसी बालिका वधुओं की अभिभावक व मां बन गई हैं. 

कृति ने 2012 में जोधपुर में सारथी न्यास की स्थापना की. वह इस संगठन में स्वास्थ्यलाभ मनोवैज्ञानिक व प्रबंधन न्यासी हैं. उसने बताया, 'देश से बाल विवाह का उन्मूलन करने की दृढ़ प्रतिज्ञा लेकर मैंने दर्जनों बालविवाह की घटनाएं रुकवाई हैं. लेकिन बाल विवाह निरंतर जारी हैं और निर्दोष बच्चियों को परंपरा का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उनकी जिंदगी बर्बाद की जा रही है'.

कृति ने इस समस्या का समाधान करने के लिए कानूनी उपाय ढूंढ लिया है. वह बालविवाह को निरस्त करने के लिए कानून विशेषज्ञों की मदद लेने लगी है. उसने बताया, 'बाल विवाह निरसन का मतलब वर्षो पहले हुई शादियों को कानूनी तौर पर अवैध बनाना है. विवाह निरस्त होने के बाद वर्षो पहले शादी के बंधन में बंधे लड़के व लड़कियां उस बंधन से मुक्त हो जाते हैं'.

बाल विवाह की शिकार बनी लक्ष्मी सरगरा कृति के पास मदद मांगने आई थी. कृति ने उसकी मदद की और उसका वैवाहिक बंधन निरस्त करवाया गया जोकि देश पहली घटना है. इस घटना के बाद उसका संगठन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया. इस घटना से वह न सिर्फ चर्चा में आईं बल्कि उसके इस अभियान को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 11वीं और 12वीं कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया. 

कृति के प्रयासों से अब तक 26 बाल विवाह को निरस्त करने में मदद मिली है. यही नहीं हजारों बालविवाह रुकवाने का कीर्तिमान स्थापित करने के लिए कृति का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस और वर्ल्ड रिकॉर्डस इंडिया व यूनीक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है. तीन दिन में तीन बाल विवाह को निरस्त करने के लिए वर्ष 2016 में उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्डस इंडिया व यूनीक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है. 

(इनपुट-आईएएनएस)