राजस्थान में 12 लेन के दिल्ली-मुंबई-एक्सप्रेस हाईवे का काम रुका

दिल्ली-मुंबई-एक्सप्रेस वे कोरिडोर कोटा जिले में बूंदी जिले के कापरेन के बाद चंबल नदी को क्रॉस करता हुआ दीगोद तहसील के कोटरापुरा गांव से प्रवेश करेगा

राजस्थान में 12 लेन के दिल्ली-मुंबई-एक्सप्रेस हाईवे का काम रुका
105 किलोमीटर लंबा हाइवे कोटा जिले से भी गुजरेगा

हिमांशु मित्तल/कोटा: प्रदेश के शहर कोटा में भारतमाला परियोजना के अधीन बनने वाले 12 लेन के दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे कॉरिडोर का मामला आकर खटाई में पड़ता नजर आ रहा है. सेटलमेंट और सीएडी के भू-अभिलेख के रिकॉर्ड में कैचमेंट एरिया अलग-अलग जगह दर्शाया गया है. ऐसे में जमीन एक्वायर करने का काम अटक गया है. कोटा जिले में 105 किलोमीटर हाईवे बनना है. जिसमें से 17 किलोमीटर केचमेंट एरिया के वजह से दिक्कत आ गई. इसमें जहां पर व्यक्ति का मालिकाना हक दिखाया गया है. वह रेवेन्यू रिकॉर्ड से मिल नहीं पा रहा है. इस कारण भूमि अवाप्ति का काम बंद जैसा ही है. ऐसे में जब तक पूरे कोटा जिले की भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है. इस भारतमाला परियोजना में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे कॉरिडोर के निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाएगा.

दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे कोरिडोर कोटा जिले में बूंदी जिले के कापरेन के बाद चंबल नदी को क्रॉस करता हुआ दीगोद तहसील के कोटरापुरा गांव से प्रवेश करेगा. इसके बाद 105 किलोमीटर लंबा हाइवे कोटा जिले से गुजरेगा जो रामगंजमंडी तहसील के लसूडिया गांव में खत्म होगा. लेकिन इस हाईवे के निर्माण के बीच भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया में दीगोद तहसील के 12 गांव का केचमेंट एरिया में हैं, लेकिन इन 12 गांव का रिकॉर्ड सीएडी और सेटलमेंट विभाग में अलग-अलग दर्ज है. ऐसे में उनकी जमाबंदी और खसरा नंबर मैच नहीं कर पा रहे हैं. इस कारण भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया अटक गई है. अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा है.

दीगोद क्षेत्र के केचमेंट एरिया से प्रभावित 12 गांवों में मोराना, झाड़ गांव, झोपड़ियां, खेड़ली तंवरान, नीमली, सुल्तानपुर जालिमपुरा, तोरण, कचोलिया, मेहंदी, कंवरपुरा व देवपुरा की 191 हेक्टेयर जमीन है. जिसकी अब अवाप्ति में दिक्कत आ रही है. इन गांवों में भूमि अवाप्त होने पर 17.35 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी.

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार कोटा जिले में 64 गांव की भूमि अवाप्ति का काम चल रहा है. रामगंजमंडी, कनवास और लाडपुरा में भूमि अवाप्ति का काम एडवांस स्टेज पर पहुंच गया है, लेकिन दीगोद तहसील के 12 गांव ऐसे हैं, जो केचमेंट एरिया के गांव है, जहां पर जमीन अवाप्ति में अड़ंगा लगा हुआ है. इसमें प्रगति नहीं हो पा रही है. केचमेंट एरिया के इन गांवों में जहां पर जमीन का मालिकाना हक दिखाया हुआ है. वह जमाबंदी रिकॉर्ड से अलग है. ऐसे में इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार के रेवेन्यू विभाग को अवगत कराया है.

फ़िलहाल इस मामले का कोई हल निकलता दिख नहीं रहा क्योंकि मामला पेचीदा है इसका हल राज्य सरकार -NHAI और ग्रामीणों के साथ मिलकर बातचीत के बगैर किसी और तरीके से निकल पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है.