राजस्थान: सालों से पूरी नहीं हुई ये भर्तियां, रोजगार के इंतजार में 12 हजार बेरोजगार

सालों से दूसरी सूची का इंतजार कर रहे बेरोजगार कई बार संघर्ष का सहारा ले चुके हैं. 

राजस्थान: सालों से पूरी नहीं हुई ये भर्तियां, रोजगार के इंतजार में 12 हजार बेरोजगार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: पिछले एक दशक की बात की जाए तो प्रदेश में बेरोजगार लगातार बढ़ती जा रहा है और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है भर्तियों का समय पर पूरा नहीं होना. अगर भर्ती समय पर पूरी होती है तो उसके बाद भर्तियों की दूसरी सूची का सालों तक इंतजार. 

प्रदेश में करीब ऐसी ही एक दर्जन भर्तियां हैं, जिनमें दूसरी सूची का सालों से इंतजार किया जा रहा है. दूसरी सूची के इंतजार में करीब 12 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. विभागीय लापरवाही के चलते करीब 12 हजार बेरोजगार आज भी रोजगार का इंतजार कर रहे हैं.

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प्रदेश में भर्तियों में लगने वाला लंबा समय और उनमें विसंगतियां आम बात है. भर्तियों में पहली सूची जारी होने के बाद खाली रहे पदों पर दूसरी सूची के जरिए पदों को भरा जाता है लेकिन प्रदेश के करीब दर्जन भर भर्तियां ऐसी हैं, जिनको सालों से दूसरी सूची का इंतजार हो रहा है.

  • सूचना सहायक भर्ती 2013, 1976 पदों पर वेटिंग लिस्ट पर नियुक्ति का इंतजार
  • राजस्थान पुलिस भर्ती 2018, करीब 1600 पदों पर दूसरी सूची का इंतजार
  • रीट शिक्षक भर्ती 2016, 826 अंग्रेजी, 877 साइंस मैथ के पदों पर दूसरी सूची का इंतजार
  • रीट शिक्षक भर्ती 2017, संस्कृत विभाग में 336 पदों पर दूसरी सूची का इंतजार
  • रीट शिक्षक भर्ती 2018, 2840 लेवल द्वितीय, 766 लेवल प्रथम पर दूसरी सूची का इंतजार
  • एलडीसी भर्ती 2018, कम किए गए 587 पदों की सूची का इंतजार
  • जूनियर अकाउंटेंट भर्ती 2013, 1751 पदों पर दूसरी सूची का इंतजार
  • द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2016, करीब 1200 पदों पर दूसरी सूची का इंतजार
  • आयुर्वेद नर्सिंग भर्ती 2013, 1005 पदों पर दूसरी सूची का इंतजार

सालों से दूसरी सूची का इंतजार कर रहे बेरोजगार कई बार संघर्ष का सहारा ले चुके हैं. कभी अधिकारियों के चक्कर तो कभी मंत्रियों को ज्ञापन, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. 

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ संयोजक उपेन यादव का कहना है कि "नियुक्ति को लेकर पहली सूची तो जारी हो जाती है लेकिन उसके बाद प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के चलते दूसरी सूची का सालों तक इंतजार किया जाता है. कई बार भर्तियों के पदो को लैप्स करने के उद्देश्य से दूसरी सूची जारी नहीं होती है हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बेरोजगारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए 3 सितंबर 2020 को हुई मीटिंग में लंबित सभी भर्तियों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस बात को करीब करीब 20 दिनों का समय बीत चुका है लेकिन फाइट आगे नहीं बढ़ पाई है"

बेरोजगार अब हताश होते हुए नजर आ रहे 
वहीं, भर्तियों से जुड़े हुए बेरोजगार अब हताश होते हुए नजर आ रहे हैं. सूचना सहायक भर्ती 2013 में दूसरी सूची तो जारी हुई लेकिन उसके बाद भी सालों से नियुक्ति का इंतजार है तो वहीं रीट शिक्षक भर्ती 2018 में दो सालों के बाद भी दूसरी सूची जारी नहीं हो पाई है. दोनों ही भर्तियों से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि "सालों से विभागों के चक्कर काट रहे हैं. आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं. रोजगार नहीं होने के चलते जहां खाने के लाले पड़ते जा रहे हैं तो वहीं उम्र के करीब 30 साल पूरे करने के बाद भी आज तक शादी नहीं हो पाई है. ऐसे में सरकार को चाहिए की बेरोजगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति का तोहफा दे."

बहरहाल, पिछले कई सालों से प्रशासनिक लापरवाही का दंश झेल रहे करीब 12 हजार बेरोजगारों को अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से ही आस है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों लंबित भर्तियों पर सख्ती भी दिखाई लेकिन अब देखना है कि इस सख्ती के चलते अधिकारियों के कांनों पर जूं रेंगती है या फिर फाइलें सिर्फ टेबलों पर ही चक्कर काटती रहेंगी.