राजस्थान विधानसभा सत्र नहीं बुलाए जाने पर पैदा हो सकता है संवैधानिक संकट...

तीनों पूर्व कानून मंत्रियों ने कहा कि, विधानसभा सत्र बुलाने की स्थापित संवैधानिक स्थिति से इतर जाने से, संवैधानिक संकट पैदा होगा.

राजस्थान विधानसभा सत्र नहीं बुलाए जाने पर पैदा हो सकता है संवैधानिक संकट...
सरकार ने 31 जुलाई को एक विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति मांगी थी.

जयपुर: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में कानून मंत्री रहे कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और अश्वनी कुमार ने सोमवार को राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) को पत्र लिखकर आग्रह किया कि, वह अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर विधानसभा सत्र बुलाएं, क्योंकि ऐसा नहीं करने से संवैधानिक संकट पैदा होगा.

तीनों ने इस सत्र में यह भी कहा कि राज्यपाल की तरफ से सत्र बुलाने में विलंब करने से, राजस्थान में एक ऐसा संवैधानिक गतिरोध पैदा हो गया है, जिसे पहले ही टाला जा सकता था. उन्होंने 2016 के 'नबाम रेबिया मामले' और 1974 के 'शमशेर सिंह बनाम भारत सरकार' मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के निर्णय का हवाला देते हुए कहा,  'राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर विधानसभा सत्र बुलाने को बाध्य हैं.'

तीनों पूर्व कानून मंत्रियों ने कहा कि, विधानसभा सत्र बुलाने की स्थापित संवैधानिक स्थिति से इतर जाने से, संवैधानिक संकट पैदा होगा. गौरतलब है कि, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का राज्य मंत्रिमंडल का संशोधित प्रस्ताव कुछ 'सवालों' के साथ सरकार को वापस भेज दिया है.

राजभवन सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. राजस्थान में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने विधानसभा सत्र 31 जुलाई से आहूत करने के लिये, राज्यपाल को शनिवार देर रात एक संशोधित प्रस्ताव भेजा था. जिसके बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने विशेष परिस्थितियों का हवाला देते हुए, तीन बिंदुओं पर कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए फाइल लौटा दी है. साथ ही राज्यपाल ने यह कहा कि, विधानसभा सत्र न बुलाने की कोई मंशा राजभवन की नहीं है.

(इनपुट-भाषा)