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माउंट एवरेस्ट फतेह करने के बाद दुनिया की सभी चोटियों को छूना चाहती हैं राजस्थान की ये बेटी

निवेदिता बताती हैं कि उन्होंने बचपन में केवल सोचा था कि वह प्लेन उड़ाएंगी लेकिन विश्वास नहीं था कि प्लेन उड़ाने के साथ-साथ वह माउंट एवरेस्ट भी फतेह करेंगी.

माउंट एवरेस्ट फतेह करने के बाद दुनिया की सभी चोटियों को छूना चाहती हैं राजस्थान की ये बेटी

झुंझुनूं: जिले के मुकुंदगढ़ की रहने वाली निवेदिता चौधरी. जिन्होंने अपने नाम माउंट एवरेस्ट को फतेह करने का रिकॉर्ड दर्ज किया है. यह सालों तक युवाओं को, खासकर महिलाओं को प्रेरणा देता रहेगा. जब महिलाओं के लिए सोचा भी नहीं जा सकता था कि वे माउंट एवरेस्ट फतेह कर सकती हैं. तब निवेदिता ने यह काम करके दिखाया और जब उन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया तब वे बनी वायुसेना में देश की पहली महिला अधिकारी तथा राजस्थान की पहली महिला, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट फतेह किया. 2008 में एयरफोर्स ज्वॉइन करने वाली निवेदता ने यह रिकॉर्ड 2011 में ही बनाया. जिसके बाद कई अन्य महिला अधिकारियों ने निवेदिता की प्रेरणा से यह काम किया है.

निवेदिता बताती हैं कि उन्होंने बचपन में केवल सोचा था कि वह प्लेन उड़ाएंगी लेकिन विश्वास नहीं था कि प्लेन उड़ाने के साथ-साथ वह माउंट एवरेस्ट भी फतेह करेंगी. स्कूल-कॉलेज समय में एनसीसी के कैडेट के रूप में जोश के साथ काम करने वाली निवेदिता ने कॉलेज में भी एयर विंग में एडमिशन लिया और कॉलेज से पास आउट होने के बाद पहले ही प्रयास में वायु सेना में प्रवेश ले लिया. इसके बाद जब उनके सामने माउंट एवरेस्ट फतेह करने का अवसर आया तो भी उन्होंने इसे छोड़ा नहीं. यही कारण है कि वे देश की पहली महिला अधिकारी बनी, जिसने माउंट एवरेस्ट फतेह किया है.

निवेदिता ने कहा कि सपना देखना एक बात है और सपनों को हासिल करना दूसरी बात. सपने देखेंगे नहीं तो लक्ष्य नहीं मिलेगा और उसे पूरा करने के लिए हमें जी तोड़ मेहनत भी करनी होगी. उन्होंने कहा कि उनके परिवार में कोई सेना में तो नहीं गया. लेकिन वे जिस मिट्टी से आती हैं वहां पर कण-कण में शौर्यता है. यही कारण है कि पिता के सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें नई राह दिखाई. स्कूल टाइम में भी वह पांच सालों तक राजस्थान की बेस्ट एथलीट रहीं और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व किया.

दो साल पहले ही वायु सेना से चाहे निवेदिता चौधरी रिटायर हो गई हैं और एक बेटी की मां हैं लेकिन अभी भी निवेदिता के सपनें अधूरे हैं. वह चाहती हैं कि विश्व की सभी पहाड़ों की चढ़ाई कर वए कीर्तिमान बनाएं. इसके लिए वह अभी भी जी तोड़ कोशिश कर रही हैं. हालांकि उनकी बेटी अभी छोटी है लेकिन उनका खुद का जज्बा और लगन पहले से ज्यादा बड़ा हो गया है. उन्होंने बताया कि फिजिकल फिटनेस, स्टेमिना और मोटिवेशन को वह हमेशा याद रखती हैं और उस पर काम करती रहती हैं.