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जोधपुर के इस परिवार को पूर्वजों से मिली अनोखी वसीयत, जानिए क्या....

आज हम आप को ऐसी वसीयत के बारे में बता रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे.  जिसको जोधपुर के दाऊलाल मालवीय बखूबी कर रहे हैं .

जोधपुर के इस परिवार को पूर्वजों से मिली अनोखी वसीयत, जानिए क्या....
मालवीय की इस सेवा के लिए उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके है.

भवानी भाटी/जोधपुर: वसीयत के बारे में तो हर कोई जानता है, आप ने भी सुना और देखा होगा कि वसीयत में करोड़ो की संपत्ति, धन दौलत जमीन जायदाद का लेन देन होता है. लेकिन आज हम आप को ऐसी वसीयत के बारे में बता रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. इस अनोखी वसीयत में एक परिवार को मिली है समाज सेवा वह भी पानी में डूबते को बचाने की सेवा. जिसको जोधपुर के दाऊलाल मालवीय इस सेवा को बखूबी कर रहे हैं .

जोधपुर के दाऊजी दाऊलाल मालवीय पिछले 50 साल से डूबने वालों को बचा रहे हैं. अगर पानी मे कोई डूब रहा हो तो प्रशासन भी दाऊलाल को ही याद करता है. बिना जान माल की चिंता किए निस्वार्थ भाव से यह शख्स अपनी टीम के साथ हर समय मुस्तैद रहते है.

दाऊलाल अब तक हजारों लोगों को तैरने का भी प्रशिक्षण दे चुके हैं ताकि कभी कोई पानी में गिर जाएं तो अपनी जान बचा सकें. उन्होंने आर्मी और पुलिस के जवानों को भी निशुल्क विशेष प्रशिक्षण दिया है. मालवीय की इस सेवा के लिए उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके है. मालवीय के पिता विष्णुदास ने कइयों का जीवन बचाया था. उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा था कि मेरे पुत्र और पौत्र यह मानव सेवा निशुल्क करते रहें, इससे बड़ा धर्म कोई नहीं है. अब 50 साल से मालवीय अपने पिता की इसी आखिरी इच्छा को  परम धर्म मानकर अपने पुत्रों और पोतों के साथ मानव सेवा में जुटे हैं.

मालवीय परिवार की यह अनूठी मानव सेवा न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश मे समाज सेवा करने वाले लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. पिता से विरासत में मिली वसीयत का पालन कर दाऊ जी ने मानव सेवा की तो मिसाल पेश की ही है. साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी अपने माता पिता से विरासत में मिली जिम्मेदारी का पालन करने का संदेश दिया है.