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राजस्थान की फसलों पर टिड्डी दल के हमले का खतरा, किसान परेशान

कृषि विभाग के टिड्डी नियन्त्रण दल की अब तक की कार्रवाई के बाद भी पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह इस खतरे से मुक्त नहीं हुआ है. 

राजस्थान की फसलों पर टिड्डी दल के हमले का खतरा, किसान परेशान
विभाग ने अभी तक 3 हजार 288 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों को बेअसर किया है.

जयपुर: राजस्थान की खेती पर टिड्डी दल के हमले का साया मंडरा रहा है. तकरीबन एक महीने से लगतार बने हुए इस खतरे के बीच सरकार ने टिड्डी नियन्त्रण पर काम तो किया, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह मिटा नहीं है. यही वजह है कि कृषि विभाग ने टिड्डी कन्ट्रोल रूम बनाकर दस ज़िलों की ज़िम्मेदारी के लिए पांच टीम लगातार निगरानी को तैनात कर दी है. प्रदेश में सीमावर्ती इलाकों में तो केन्द्रीय दल के साथ तालमेल करते हुए राजस्थान की टीम तैनात है, लेकिन पाकिस्तान और ईरान में बड़ी संख्या में टिड्डी के अण्डे अभी भी चिन्ता का कारण बने हुए हैं.
 
लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की हार से सरकार में चिन्ता दिख रही है, लेकिन सरकार की चिन्ता का एकमात्र कारण यही नहीं है. प्रदेश के किसानों पर परेशानी की आहट ने भी सरकार की चिन्ता बढ़ा दी है. दरअसल पिछले एक महीने से टिड्डी दल के हमले को देखते हुए उसे बेअसर करने की कवायद चल रही है. पड़ोसी देशों से राजस्थान की पश्चिमी सीमा में आने वाली फसल पर हमला करे, उससे पहले ही टिड्डी दल पर हमला करने के लिए कृषि विभाग मुस्तैद दिखा है. विभाग ने अभी तक 3 हजार 288 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों को बेअसर किया है.

कृषि विभाग के टिड्डी नियन्त्रण दल की अब तक की कार्रवाई के बाद भी पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह इस खतरे से मुक्त नहीं हुआ है. दरअसल इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग करने वाले डॉक्टर सुवालाल जाट बताते हैं कि टिड्डियों को तो बड़ी संख्या में मार दिया है, लेकिन अभी भी जिस जगह टिड्डियां बैठी थीं. वहां पर उनके अण्डों से बच्चे निकलने का खतरा बना हुआ है. इस खतरे से निपटने के लिए विभाग ने पांच टीमें बनाई हैं और उनको दस ज़िलों का ज़िम्मा दिया है. इन टीमों को जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, गंगानगर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, जालौर, सिरोही और नागौर ज़िले में सतर्क रहने को कहा गया है.

टिड्डियों का हमला पाकिस्तान की सीमा से हुआ है. वहां पर अभी भी बड़ी संख्या में टिड्डी दल मौजूद होने के कारण विभाग पशोपेश में है कि यह अभियान कब तक चलाया जाए. हालांकि इसके लिए पिछले दिनों भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियन्त्रण दल की एक उच्चस्तरीय मीटिंग बाड़मेर के मुनाबाव में हुई है. इसके बाद पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर टिड्डी के प्रभाव वाले इलाके में हवाई सर्वे और उसके बाद टिड्डी दल पर दवा के एयर स्प्रे के लिए तैयार हुआ है. 

पाकिस्तान अब टिड्डी दल पर हवाई जहाज से दवाई के स्प्रे के लिए तैयार तो हो गया है, लेकिन पड़ौसी मुल्क में जिस इलाके में टिड्डी दल सक्रिय है. वहां ज्यादा फसलें नहीं हैं. साथ ही राजस्थान में पछुआ हवाओं के साथ यह टिड्डी दल दाखिल हो रहा है. ऐसे में पाकिस्तान की नीयत भारत को टिड्डी दल के किसी हमले से बचाने में कितनी साफ होगी. इसे लेकर विभाग को लगातार सजग रहना होगा.