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अलवर के सरिस्का अभ्यारण्य में बाघ की मौत, सवालों के घेरे में वन विभाग

इस बाघ को दो माह पहले ही रणथंबौर राष्ट्रीय पार्क से सरिस्का में स्थानांतरित किया गया था. इसकी उम्र सात से आठ साल की थी.

अलवर के सरिस्का अभ्यारण्य में बाघ की मौत, सवालों के घेरे में वन विभाग
सरिस्का में अब तीन बाघ, आठ बाघिन और पांच शावक बचे हैं.

जयपुर: अलवर का सरिस्का अभ्यारण्य टाइगर सेंचुरी के नाम से विख्यात है लेकिन लगातार सरिस्का की खूबसूरती और पहचान को ग्रहण लगता जा रहा है. शनिवार को फिर सरिस्का के जंगल में हुई एक और टाइगर एसटी 16 की मौत से वन विभाग पर फिर सवाल उठ लगे हैं. इस बाघ को दो माह पहले ही रणथंबौर राष्ट्रीय पार्क से सरिस्का में स्थानांतरित किया गया था. इसकी उम्र सात से आठ साल की थी.

तोमर ने कहा, 'वह घायल था इसलिए शनिवार को सुबह उसे शांतिदायक दवा (ट्रैंक्विलाइज़र) दी गई. वह लगभग दो किलोमीटर चला और गिर गया. विशेषज्ञों की उपस्थिति में आज, मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया जाएगा'. सरिस्का में अब तीन बाघ, आठ बाघिन और पांच शावक बचे हैं.
 
अलवर के सरिस्का में बाघों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा पिछले कुछ समय मे सरिस्का में चार बाघों की मौत हो चुकी है. अब एकबार फिर एक और बाघ एसटी 16 की आज मौत की खबर आने से वन्य जीव प्रेमियों में आक्रोश बना हुआ है. सेव द टाइगर का नारा तो हमेशा हम सुनते आ रहे है लेकिन सरिस्का में हो रही लगातार बाघों की मौत से वन विभाग पर सवाल उठना लाजमी है. 

बता दें कि सरिस्का में रणथम्भोर से बाघों को शिफ्ट करने की कवायद के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन क्षेत्र में सरिस्का फिर सुर्खिया बटोरने लगा था, लेकिन पिछले करीब एक से डेढ साल में चार बाघ बाघिनों की मौत हो गयी. इसमे हम आपको बता दे सबसे पहले एसटी 1 को जहर देकर मारा गया. उसके बाद एक बाघ की मौत खेतो में लगाये बाड़ेबंदी में फंसने से उसकी मौत हुई.

वहीं एसटी 5 का कही अतापता नहीं चल पाया, इसके बाद एसटी 4 की मौत पर भी सवाल वन विभाग पर ही उठे थे. बताया जाता है एसटी 4 और 6 में झगड़ा हुआ जिसमें एसटी 4 घायल हो गया. तब उसे बाड़े में डाल दिया गया. उसे खाने के लिए एक पड्डा भी डाला गया लेकिन जख्मी होने के चलते वह शिकार नहीं कर पाया और भूख से उसकी मौत हो गयी. 

इसे वन विभाग की बड़ी लापरवाही कहे या अनदेखी की टाइगर की मौत भूख से हुई पोस्टमार्टम में भी उसका अमाशय खाली था. अब एक बार फिर एसटी 16 की मौत का कारण भी यही बताया जा रहा है. बीमारी के चलते उसे ट्रंक्यूलाईज किया गया था और उसमे ओवर डोज की वजह भी कारण हो सकती है. अभी इसकी मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा. 

एक बड़ा सवाल यह भी है क्या टाइगर्स की हत्याएं की जा रही है? क्या यह सब साजिश के तहत प्लानिग से काम किया जा रहा है, ताकि सरिस्का डवलप न हो इन सब बातों के जवाब के लिए पूर्व वन्य जीव प्रतिपालक अनिल जैन ने सीबीआई की जांच की मांग की है और प्रदेश सरकार इसकी जांच के लिए विशेष टीम बनाए.