Ranthambore National Park: मां की सत्ता पर राज करना चाहती टाइग्रेस रिद्धि, दिए संकेत

छली की हर पीढ़ी में मादा शावक ने अपनी मां को बेदखल कर उसकी टेरेटरी पर कब्जा करने का इतिहास रही है.

Ranthambore National Park: मां की सत्ता पर राज करना चाहती टाइग्रेस रिद्धि, दिए संकेत
प्रतीकात्मक तस्वीर.

अरविंद सिंह चौहान, सवाई माधोपुर: यूं तो रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) बाघों की अठखेलियों के लिए विश्व में अपनी अलग ही पहचान रखता है. बाघों का स्वछन्द विचरण पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर लेता है. रणथंभौर को आबाद करने वाली टाइग्रेस मछली दुनिया से अलविदा हो चुकी है लेकिन उसकी यादें आज भी वन्यजीव प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं.

रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) इन दिनों टाइग्रेस रिद्धि की खासा चर्चा हो रही है. टाइग्रेस मछली को लाइफ टाइम अचीव अवार्ड से सम्मानित किया गया था और मरने के बाद उसे गार्ड ऑफ ऑनर देकर उसे सम्मान पूर्ण विदाई दी गयी थी. मछली को क्रोकोडायल किलर, लेडी ऑफ लैक के नाम से जाना जाता था. रणथंभौर में मछली की पांचवी पीढ़ी के चर्चे इन दिनों सबकी जुबान पर हैं. मछली की परपोती बाघिन रिद्धि में अब लोग मछली की झलक देख रहे हैं. टाइग्रेस रिद्धि अब अपनी परनानी मछली के नक्शे कदम चलने की ओर अग्रसर हो रही है.

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रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) में टेरेटरी को लेकर टाइग्रेस एरोहेड और रिद्धि के बीच हुई फाइटिंग से रिद्धि सुर्खियों में आई थी. टाइग्रेस एरोहेड ने दो साल पहले दो मादा शावकों को जन्म दिया था, जिनको रिद्धि और सिद्धि नाम दिया गया. रिद्धि अभी दो साल की है और अपनी अलग टेरेटरी की तलाश कर रही है. नेचर गाइडों की मानें तो बाघिन रिद्धि बचपन से ही नटखट स्वभाव की रही है. अपनी बहन रिद्धि से लगातार मारपीट करती हुई कई बार देखी गयी है जैसे-जैसे रिद्धि बड़ी हो रही है. मां से अलग होकर अपनी अलग टेरेटरी बनाने का प्रयास कर रही है. इसके चलते बाघिन अपनी मां एरोहेड की कई बार संघर्ष कर चुकी है. जंगल में जो ताकतवर है, उसी का राज चलता है. रिद्धि डेयरिंग किस्म की बाघिन है. रिद्धि के चर्चे इन दिन वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, गाइड, चालक एवं वन्यजीव प्रेमियों में चल रहे हैं. 

मां को ही कर रही बेदखल
गौरतलब है कि मछली की हर पीढ़ी में मादा शावक ने अपनी मां को बेदखल कर उसकी टेरेटरी पर कब्जा करने का इतिहास रही है. इस तरह की फितरत मछली के जीन्स में है. मछली की पांचवी पीढ़ी में उसी इतिहास को दोहराया जा रहा है. बाघिन रिद्धि अपनी मां एरोहेड को बेदखल कर उसकी टेरेटरी पर कब्जा करने का प्रयास कर रही है. यही कारण है कि मां बेटी के बीच बर्चस्व की जंग चल रही है. बाघिन रिद्धि ने बीते एक माह में कई बार अपनी मां एरोहेड को आंखें दिखाई है. 

इस दौरान कई बार उनके संघर्ष का वीडियो भी बना और काफी वायरल हुआ. पिछले सम्ताह बाघिन रिद्धि एक पेड़ पर घंटों चहलकदमी करती देखी गयी, जो तस्वीरें पर्यटकों को खाशा रोमांचित करने वाली हैं. रिद्धि ने दो दिन पूर्व एक अजगर से फाइट की और अजगर को पंजों की मार से लहूलुहान कर दिया. अजगर को जान बचाकर भागना पड़ा. गाइड ने बताया कि रिद्धि ने कुछ दिन पूर्व मगरमच्छ से भी बराबर फाइट की थी. इस तरह की रिद्धि की जाबांजी उसकी पड़नानी मछली की यादो कों तरोताजा कर देती है.

रणथंभौर का दिल है यह एरिया
रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) एक खूबसूरत क्षेत्र, जिसे जोन नम्बर 3 में बांटा गया है. झरनों, तालाबों से परिपूर्ण इस क्षेत्र को रणथंभौर का दिल कहा जाता है. यही वो एरिया है, जहां मछली ने सालों राज किया और उसके बाद उसकी बेटी सुन्दरी ने उसे बेदखल कर उस पर कब्जा किया. बाद में सुन्दरी की बेटी कृष्णा ने अपने बाहुबल से अपनी ही मां सुन्दरी को बेदखलकर उसकी टेरेटरी पर राज किया. समय बीतने के बद कृष्णा की बेटी एरोहेड ने उसकी कहानी को दोहराते हुए अपनी मां को मार कर भगा दिया और रणथंभौर की दिलों पर राज करने लगी. समय के साथ एरोहेड ने दो मादा शावकों को जन्म दिया और अब वो 2 साल की हो गयी. जवानी की ओर बढ़ रही बेटी रिद्धि भी इतिहास को दोहराकर अपनी मां की टेरेटरी छीनने का प्रयास कर रही है. इसी के चलते रिद्धि के चर्चे होने लगे हैं. विश्व की सबसे प्रसिद्ध बाघिन मछली की पांचवी पीढ़ी की पड़पेाती रिद्धि अब रणथंभौर क्वीन बनने की ओर चल पड़ी है. 

राजबाग, पदम तालाब वाली टेरेटरी ही सबसे अधिक बाघ बाघिन को क्यों प्रिय है, इसका जवाब भी हम आपको बता देते हैं. रणथंभौर (Ranthambore National Park) का जोन नंबर 3 सबसे हरा भरा एवं पोखरों, तालाबों, झरनों एवं घास से आबाद इस क्षेत्र में वन्यजीवों का जीवनयापन करने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं. नेचर गाइड यादुवेन्द्र सिंह ने बताया कि टाइगर को जीवन यापन करने के लिए फूड, वाटर एवं शेल्टर तीनों चीजें चाहिए, जो इस क्षेत्र उचित रुप में मोजूद हैं. यही कारण है कि बाघ-बाघिन इसी क्षेत्र को अपनी टेरेटरी बनाना चाहते हैं.