धौलपुर के सरकारी स्कूल जिले में आए अव्वल, ट्रेन वाले गुरुजी ने कुछ किया ऐसा...

अध्यापन के घिसे-पिटे तरीकों से हट कर नई तकनीकी का सहारा लिया. जिले में ट्रेन वाले स्कूल के गुरुजी के रूप में चर्चित एचएम राजेश शर्मा ने समय-समय पर खुद के वेतन से छात्रों एवं स्कूल के लिए सुविधाएं जुटाई.

धौलपुर के सरकारी स्कूल जिले में आए अव्वल, ट्रेन वाले गुरुजी ने कुछ किया ऐसा...
धौलपुर के सरकारी स्कूल जिले में आए अव्वल.

धौलपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूल की जो छवि आम जनमानस में बनती है, उसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदार माना जाता है. शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षक ही निशाने पर होते हैं. लेकिन बीतें सालों से जिले के राजकीय प्राथमिक स्कूल शेरपुर के युवा संस्था प्रधान राजेश शर्मा इस छवि को तोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं. अध्यापन के घिसे-पिटे तरीकों से हट कर नई तकनीकी का सहारा लिया. जिले में ट्रेन वाले स्कूल के गुरुजी के रूप में चर्चित एचएम राजेश शर्मा ने समय-समय पर खुद के वेतन से छात्रों एवं स्कूल के लिए सुविधाएं जुटाई.

वहीं, भामाशाहों से सहयोग लेकर विद्यार्थियों को निशुल्क यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, टाई बेल्ट, लोअर टीशर्ट, ऊनी जर्सी उपलब्ध कराकर उनकी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है. यही नहीं, जो विद्यार्थी घरों से नहा कर नहीं आते उनको संस्था प्रधान अपने हाथों से नहलाकर क्लास में बिठाते है. स्कूल में अपने पैसे से सुंदर गार्डन तैयार कर पूरे स्कूल कैंपस को ग्रीन बेल्ट में तब्दील कर जगह-जगह कूड़ेदान छात्रों के हाथ धोने के लिए वॉश बेसिन लगाकर साफ सफाई पर विशेष फोकस दिया गया है.

शेरपुर पहला सरकारी प्राइमरी स्कूल है, जिसमें छात्रों की एवं स्कूल भवन की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए. विद्यालय के शिक्षकों ने किताब-कापी से हटकर बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाने की कोशिश में स्मार्ट टीवी, चित्र, पेटिंग आदि की मदद ली है. जैसे शिक्षक यू-ट्यूब से शैक्षिक वीडियो डाउनलोड करे उसे दिखा रहे हैं. सीखने की कौशल के हिसाब से छात्रों को राउंड टेबल एवं रंगीन कुर्सियों पर ग्रुप में बिठाकर पढ़ाया जाता है. शेरपुर का सरकारी स्कूल के नवाचारों का अनुसरण लेकिन स्कूलों में तेजी से हो रहा है. सरकारी स्कूलों की दशा एवं दिशा सुधर रही है और इसका श्रेय स्कूल के संस्था प्रधान राजेश शर्मा को जाता है.

खास बात यह है कि प्रधानाचार्य राजेश शर्मा का जुनून एवं समर्पण की बदौलत ही 5 साल पहले न्यू नामांकन की वजह से बंद विद्यालय, पुनः संचालन के बाद नामांकन की दृष्टि से सिरमौर बन गया है आज यहां 250 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय में पांच कक्षाओं को बिठाने के लिए फिलहाल केवल तीन कक्षा कक्ष उपलब्ध है. ऐसे में संस्था प्रधान राजेश शर्मा ने स्वयं तथा भामाशाह की मदद लेकर टीन शेड डालकर छात्रों की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए.

अभिभावक डॉ अतर सिंह बघेल, साहब सिंह, एसएमसी अध्यक्ष खरगजीत ने सरकार से स्कूल में दो क्लास रूम व स्कूल को आठवीं तक क्रमोन्नत करने की मांग की है. शेरपुर का प्राथमिक स्कूल सरकारी स्कूलों के लिए बना रॉल मॉडल नवाचारी विद्यालय के रूप में प्रदेश में बनाई पहचान. शेरपुर का प्राथमिक विद्यालय यूं तो ग्रामीण अंचल तक का पांचवीं तक का स्कूल है. लेकिन विद्यालय के संस्था प्रधान राजेश शर्मा के नवाचारों की बदौलत विद्यालय सरकारी स्कूलों के लिए रॉल मॉडल के रूप में जाना जाता है. स्कूल के नवाचारों की चर्चा राज्य स्तर पर होने लगी है. बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यालय इनका अनुसरण कर रहे हैं.