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मंडावा विधानसभा उप-चुनाव में कांग्रेस-BJP आमने-सामने, होगी कांटे की टक्कर

हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के साथ झुंझुनूं (Jhunjhunu) के मंडावा विधानसभा के भी उप-चुनाव (Mandawa Vidhansabha By polls) होंगे.

मंडावा विधानसभा उप-चुनाव में कांग्रेस-BJP आमने-सामने, होगी कांटे की टक्कर
यहां 21 अक्टूबर को मतदान होने जा रहा है. (फाइल फोटो)

संदीप केडिया, झुंझुनूं: हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के साथ झुंझुनूं (Jhunjhunu) के मंडावा विधानसभा के भी उप-चुनाव (Mandawa Vidhansabha By polls) होंगे.

यहां से बीजेपी (BJP) के नरेंद्र कुमार (Narendra Kumar) विधानसभा चुनाव जीते थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में नरेंद्र कुमार सांसद बन गए. जिसके बाद उन्होंने अपने विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद से यहां उप-चुनाव होना तय था. यहां 21 अक्टूबर को मतदान होने जा रहा है. यहां का चुनावी परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित होगा.

जानिए कांग्रेस के टिकट के दावेदार
चुनाव के घोषणा के साथ ही मंडावा विधानसभा के चौपालों पर चुनावी चर्चा भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के पास फिलहाल एकमात्र और मजबूत चेहरा है पूर्व विधायक रीटा चौधरी. जिनकी टिकट भी लगभग फाइनल है. हालांकि कांग्रेस के जिला महामंत्री सतवीर कृष्णियां भी दौड़ में है. लेकिन पिछले एक-डेढ़ महीनों में सरकार ने जो घोषणाएं, काम और तबादले किए है. उस लिहाज से कांग्रेस की रीटा चौधरी का चुनावी मैदान में उतरना तय माना जा रहा है. 

बीजेपी में भी है लंबी लिस्ट
इधर, बीजेपी में टिकट चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त है. जिसमें बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस के निष्कासित नेता भी शामिल है. बीजेपी की बात करें तो यहां से सांसद नरेंद्र कुमार के पुत्र अतुल खीचड़, अलसीसर प्रधान गिरधारी खीचड़, बीजेपी के पूर्व जिला महामंत्री डॉ. राजेश बाबल, कांग्रेस से निष्कासित जिला परिषद सदस्य इंजी. प्यारेलाल ढूकिया, कांग्रेस से निष्कासित झुंझुनूं प्रधान सुशीला सिगड़ा के नाम शामिल है. टिकट को लेकर सांसद नरेंद्र कुमार ने अपने बेटे की दावेदारी को खारिज किया है और कहा है कि जो भी टिकट लाएगा, उसे जिताएंगे. वहीं पूर्व विधायक रीटा चौधरी ने कहा कि बीजेपी में टिकटों को लेकर असमंजस की स्थिति है. 

जानिए विधानसभा में कौन सी समस्याएं हो सकती है मुद्दा 
मंडावा विधानसभा के मुद्दों की बात करें तो यहां पर सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है. जिसे लेकर कांग्रेस ने बड़ी सौगात दे दी है. लेकिन इस सौगात को धरातल पर उतारने का मुद्दा बीजेपी बना सकती है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में 91 करोड़ रुपए का प्रावधान मंडावा विधानसभा के सभी गांवों को मीठा पानी उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से डीपीआर के लिए रखा है. इसके अलावा बिसाऊ और मंडावा को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का वादा भी हर चुनाव में होता है. लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए है. इसके अलावा स्थानीय मुद्दे और जातिगत समीकरणों के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा. यहां पर सर्वाधिक मतदाता जाट है. जबकि दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटर है. जो जीत-हार को तय करते हैं.

जारी है आरोप-प्रत्यारोप का दौर
लगातार तीन चुनाव आमने-सामने लड़ चुके कांग्रेस की पूर्व विधायक रीटा चौधरी तथा बीजेपी के सांसद नरेंद्रकुमार ने भी चुनावों से पहले ही अपने शब्दों के बाण शुरू कर दिए है. चुनाव से ठीक पहले मंडावा विधानसभा क्षेत्र में किए गए तबादलों को लेकर दोनों आमने-सामने हो चुके है. 

कर्मचारियों के तबादले पर बीजेपी सांसद साध रहे निशाना
सांसद नरेंद्रकुमार आरोप लगा चुके है कि कांग्रेस केवल और केवल मंडावा विधानसभा के कर्मचारियों से जुड़ी तबादला सूची जारी कर कर्मचारियों में खौफ पैदा करना चाहती है. वहीं, उन्होंने एक मारवाड़ी कहावत बोलते हुए कहा कि कांग्रेस डूब गई है. 

कांग्रेस ने किया पलटवार
इधर, सांसद के बयानों पर रीटा चौधरी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि सांसद पूरे लोकसभा क्षेत्र के है. लेकिन अभी भी उनका मोह मंडावा से भंग नहीं हो रहा है. पूरा फोकस लगाए बैठे है. बीजेपी ने हमेशा नकारात्मक राजनीति की है. अब वे तबादलों को इश्यू बनाकर कर्मचारियों को भड़काना चाहता है.

दिलचस्प हो सकता है मुकाबला
मंडावा विधानसभा के राजनैतिक इतिहास की बात करें तो 2018 में पहली बार यहां पर बीजेपी ने चुनाव जीता था. इससे पहले कभी भी बीजेपी अपना खाता नहीं खोल पाई. वहीं, पिछले तीन चुनावों में रीटा चौधरी और नरेंद्रकुमार के बीच ही मुकाबला हुआ. जिसमें दो बार मुकाबला बेहद नजदीकी का रहा है. ऐसे में तय है कि मुकाबले में चाहे इस बार रीटा और नरेंद्र ना हो. लेकिन मुकाबला इस बार भी दिलचस्प रहेगा. क्योंकि कांग्रेस का राज प्रदेश में है तो बीजेपी का राज केंद्र में. वहीं इस सीट पर बीजेपी अपना जलवा बरकरार रखना चाहेगी तो वहीं कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट पर फिर से हथियाने की कोशिश करेगी. देखने वाली बात यह होगी कि 24 अक्टूबर को आने वाले परिणाम किस करवट बैठेंगे.

रिटा चौधरी के पिता रहे हैं कांग्रेस के दिग्गज नेता
कांग्रेस से टिकट के दावेदार रीटा चौधरी पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं कद्दावर नेता स्व. रामनारायण चौधरी की बेटी हैं. उनका मंडावा विधानसभा में खुद का अपना वोट बैंक है. उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मात्र 2346 वोटों से हारा था.

इन बातों से चुनावों में हो सकती है परेशानी
कांग्रेस टिकट की प्रबल दावेदार रीटा चौधरी का हाल ही हुए तबादलों के कारण अंदरूनी विरोध संभव हो सकता है. रीटा चौधरी की कांग्रेस में सक्रिय ओला गुट से अदावत भी जारी है. इसके साथ ही उनका चुनाव मैनेजमेंट भी कमजोर माना जा रहा है.

टिकट के दावेदार में यह भी हैं शामिल
कांग्रेस की टिकट के दावेदारों की लिस्ट में जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सतवीर कृष्णियां भी शामिल है. उन्हे नया चेहरा माना जाता है. उनकी दावेदारी पर किसी के विरोध की संभावना नहीं है. माना जा रहा है कि सतवीर को टिकट मिलने पर रीटा विरोधियों का साथ संभव नहीं है. लेकिन उनका नकारात्मक पक्ष क्षेत्र में पकड़ नहीं होना और खुद का वोट बैंक नहीं होना शामिल है. 

जानिए कौन-कौन हैं बीजेपी के दावेदार
झुंझुनूं के सांसद नरेंद्र कुमार के पुत्र अतुल खीचड़ भी बीजेपी से टिकट के दावेदार हैं. सांसद के बेटे होने के कारण उनसे आमजन परिचित हैं. सांसद पुत्र अतुल मिलनसार व्यक्तित्व के माने जाते हैं. लेकिन उनके मैदान में आने से असमंजस की स्थिति हो सकती है. साथ ही स्थानीय सांसद और बीजेपी पर वंशवाद का नारा लग सकता है.

अलसीसर के प्रधान गिरधारी खीचड़ भी बीजेपी टिकट के दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं. उनकी युवाओं में अच्छी पैठ मानी जाती है. उसके साथ ही रीटा विरोधी कांग्रेसी गुट से भी उनके अच्छे संपर्क हैं. लेकिन उनके भाई की विवादास्पद छवि, सक्रियता में कमी और बाहर के पंचायतों में पकड़ नहीं होना उनका नकारात्मक पक्ष माना जाता है.